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धान के लिए मुसीबत बना मौसम, भूरा फुदका कीट का बढ़ा प्रकोप

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- कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम का फसल पर असर
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- दवाई का अधिक छिडक़ाव भी गुणवत्ता को करेगा प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। बदलता मौसम का मिजाज धान की फसल के लिए खतरा बन रहा है। दिन और रात के तापमान में करीब दस डिग्री का अंतर है, जिससे फसल को बीमारियां घेर रही हैं। धान में भूरा फुदका कीट का प्रकोप बढ़ गया है।
धान की कटाई तेजी नहीं पकड़ पा रही है। जिले में अभी तक सिर्फ 20 फीसदी धान की कटाई शुरू हुई है। जबकि सितंबर माह बीतने वाला है। पारा करीब 35 डिग्री पर है। कृषि विज्ञान केंद्र खेकड़ा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप चौधरी कहते हैं कि किसान लगातार फोन कर फसल में भूरा फुदका कीट का प्रकोप बता रहे हैं। रोजाना तीन-चार किसानों की शिकायतें पहुंच रही हैं। कीट तने का रस चूस लेता है, जिससे बालियां खराब हो जाती है। किसानों को कीटनाशक के छिड़काव की सलाह दी गई है।
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दवाई छिडक़ाव का नुकसान
बागपत। डॉ. संदीप चौधरी बताते हैं कि फसल पकने को तैयार है। ऐसे में अधिक कीटनाशक से दानों पर धब्बे बन सकते हैं। जिससे गुणवत्ता खराब होती है।
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दो हजार हेक्टेयर रकबा बढ़ा
बागपत। पिछले साल जिले में धान का रकबा पांच हजार हेक्टेयर था। इस बार धान का रकबा सात हजार हेक्टेयर है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह का कहना है कि कटाई शुरू हो गई है।
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यहां पैदा होता है धान
बागपत। जिले के बागपत, पिलाना और खेकड़ा ब्लॉक में धान की फसल की अधिक पैदावार होती है।
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