- 17 जुलाई को कंबोडिया में नौकरी करने की बात कहकर घर से गए थे विकास राणा, परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शासन के माध्यम से एंबेसी में पत्र भेजकर मुक्त कराया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली (बागपत)। कंबोडिया में नौकरी के लिए बुलाकर बंधक बनाए गए धनौरा सिल्वरनगर गांव निवासी विकास राणा शुक्रवार को पांच माह बाद अपने घर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि कमीशन के लालच में एजेंट यहां से नौकरी के बहाने युवकों को विदेश भेजकर फंसा देते हैं। मेरी तरह अन्य कोई युवक विदेश में ऐसे न फंसे। उन्होंने युवाओंं से सावधान रहने की भी अपील की।
धनौरा सिल्वरनगर गांव निवासी डोली ने एसपी को दी शिकायत में बताया कि उसके पति विकास राणा खेती करते थे। उनके परिवार का युवक अमित कई बार विदेश में नौकरी करने जा चुका है, जिन्होंने उसके पति विकास की विदेश में नौकरी लगवाने की बात कहकर पासपोर्ट बनवाया। इसके बाद 17 जुलाई को दोनों घर से थाईलैंड में नौकरी करने जाने की बात कहकर गए थे। दस दिन बाद उसके पति ने फोन करके बताया कि कंपनी ने उन्हें नौकरी के लिए कंबोडिया भेज दिया है, जबकि अमित को किसी दूसरी जगह भेजा गया है। इसके बाद 14 अक्तूबर को फोन करके कंबोडिया में पासपोर्ट छीनकर बंधक बनाने और यातनाएं देने के बारे में बताया। शिकायत मिलने पर एसपी सूरज कुमार राय ने साइबर क्राइम मुख्यालय लखनऊ को पत्र भेजकर पूरे मामले के बारे में बताया।
वहां से इंडियन साइबर क्राइम कमांड सेंटर में पत्र भेजा गया तो इसमें आगे की कार्रवाई करते हुए विदेश मंत्रालय को पूरी स्थिति से अवगत कराया गया। विदेश मंत्रालय ने कंबोडिया में भारतीय दूतावास से संपर्क किया और स्थानीय प्रशासन से बात करके विकास राणा को मुक्त कराया गया। इसके बाद हवाई जहाज से विकास राणा दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे और शुक्रवार दोपहर अपने घर पहुंच गए।
- एजेंटों पर की जाए कार्रवाई
धनौरा सिल्वरनगर गांव में अपने घर पहुंचे विकास राणा ने बताया कि उनके साथ कंबोडिया से नौ युवक भारत वापस आए हैं, जो अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं। सभी युवकों को एजेंटों ने झूठ बोलकर विदेशी कंपनियों के पास भेजा था। उन्होंने ऐसे एजेंटों को चिह्नित कर कार्रवाई करने की मांग की।