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बिनौली थाने की हवालात से फरार हो चुका शातिर धनपत

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बागपत। रमाला थाना क्षेत्र के ककड़ीपुर गांव के शातिर अनिल धनपत पर जिले में 11 मुकदमे दर्ज हैं। सात साल पहले लूट का पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद धनपत ने एक के बाद एक आपराधिक वारदात को अंजाम दिया। बिनौली थाने की हवालात में कुंबल कर वह फरार हो गया था।
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मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र में मुठभेड़ के बाद दबोचे गए अनिल धनपत ने सात साल पहले रमाला थाना क्षेत्र में लूट की वारदात को अंजाम दिया था। गांव से वह अधिकतर बाहर ही रहा। बिनौली थाना क्षेत्र के सिरसली गांव के फायरमैन भूपेंद्र हत्याकांड में नामजद किया गया। पुलिस ने पकड़ा तो वह बिनौली थाने की हवालात में कुंबल कर फरार हो गया था। पुलिस ने बाद में उसे किसी तरह पकड़ा। धनपत पहले प्रमोद गांगनौली गैंग में शामिल रहा। मगर, प्रमोद के मारे जाने के बाद उसने गैंग बदल लिया। इसके बाद वह ऊधम सिंह गैंग में शामिल हो गया और कई वारदातों को अंजाम दिया।
लविश की हत्या के बाद पीछे पड़ी थी पुलिस
बागपत। लखनऊ में रठौड़ा के लविश की हत्या के बाद पुलिस अनिल के पीछे पड़ी थी। पुलिस उसे ढूंढ ही रही थी कि वाजिदपुर गांव के वादी प्रशांत की मुजफ्फरनगर में हत्या कर दी गई। इसके बाद अनिल को नामजद किया गया है।
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अपना गैंग तैयार करने में जुटा था
बागपत। प्रमोद गांगनौली के गैंग में शामिल रहे अनिल धनपत अपना गैंग तैयार करने में जुटा था। पहले अपने गांव के फोनी के साथ मिलकर कोशिश की, लेकिन फोनी मुठभेड़ में मारा गया। कई अन्य युवक गैंग में मिलाए। मगर, लखनऊ में लविश की हत्या के बाद से गैंग बनाने के मंसूबों पर पानी फिर गया।
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