गाजियाबाद की सीमा से सटे गांवों के अधिकांश किसान सब्जी की खेती कर रहे हैं। लोकी, तोरई, आलू के अलावा गोभी की खेती की जाती है। सितंबर माह में गोभी की फसल बुवाई के बाद नवंबर-दिसंबर में फसल तैयार हो जाती है और इन महीनों में शादी-विवाह शुरू होने से फसल का दाम भी अच्छा मिल जाता है।
किसानों का कहना है के पिछले तीन साल से सब्जी किसान मंदी की मार झेल रहा है। मंडी में अब गोभी का दाम तीन रुपये किलो तक हो गया है, जिससे गोभी को वहां तक लेकर जाने में ज्यादा खर्च आ जाता है। इसलिए ही खेतों में जुताई शुरू कर दी है।
एक बीघा फसल में आता है पांच से छह हजार का खर्च
किसानों का कहना है कि एक बीघा गोभी की फसल तैयार करने में 5 से 6 हजार रुपये का खर्च आता है। लगभग 20 दिन पहले मंडी में गोभी का भाव 20 से 25 रुपये प्रति किलो था, लेकिन एक सप्ताह से भाव गिरकर तीन रुपये प्रति किलो तक रह गया है।
इससे खेतों में लगाए गए मजदूरों की मजदूरी भी नहीं निकल रही है। वहीं खेत से गोभी को मंडी तक भी लेकर जाना पड़ता है। किसान गोभी की फसल की ट्रैक्टर से जुताई कर गेहूं की फसल की बुवाई की तैयारी में लग गए हैं।
गोभी का दाम गिरने से मजदूरी व मंडी तक जाने का किराया भी नहीं निकल रहा है। मजबूरी में फसल को नष्ट कराकर गेहूं की फसल के लिए खेत तैयार करना पड़ रहा है। - नूर मोहम्मद
40 बीघा में गोभी की फसल बोई गई थी, मगर मंडी में दाम गिरने से लागत निकालना दूर, मजदूरी निकालना भी मुश्किल हो गया है। घाटा होने पर फसल को नष्ट कराना पड़ रहा है। -जाहिद
गोभी का भाव अचानक गिरने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। लागत न निकलने के कारण फसल को नष्ट करने के अलावा कोई चारा भी नहीं है। -शकील
मंडी में कोई गोभी लेकर आता है तो वह अच्छे किस्म की होने पर तीन रुपये किलो तक बिक जाती है। अब गोभी की आवक काफी कम हो गई है, क्योंकि किसानों का गोभी को मंडी तक लाने का खर्च भी नहीं निकल रहा है। -नरेश चंद कश्यप, आढ़ती
पिछले कई साल से गोभी के दाम गिर रहे हैं। दाम कम होने के कारण फसल को नष्ट करना मजबूरी है। अब गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयारा कराया जा रहा है।- जाकिर