बागपत। डेयरी खोलकर रोजगार करने के लिए लोगों ने बैंक से लोन लिया। उस पर पशुपालन विभाग से सब्सिडी भी जारी हो गई, मगर अधिकतर जगह डेयरी कागजों से बाहर निकलकर जमीन पर नहीं आ सकी। यहां इस तरह ही डेयरी खोलने के नाम लोन लेकर सब्सिडी हड़पी जा रही है। यह सब्सिडी भी 31.50 लाख रुपये तक है।
नन्द बाबा दुग्ध मिशन योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में 34 लोगों ने बैंकों से लोन लिया। इनके अलावा शामली के पांच लोगों ने भी यहां के बैंकों से लोन लिया। इनको लोन लेने के तीन महीने के अंदर डेयरी शुरू करनी थी, मगर दस से ज्यादा ने डेयरी शुरू नहीं की।
इस तरह की स्थिति केवल पिछले वित्तीय वर्ष की ही नहीं है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बीस से ज्यादा लोगों ने डेयरी शुरू करने के लिए लोन लिया और उस साल भी कई ने डेयरी शुरू नहीं की। इसके बाद भी पशुपालन विभाग से सभी को सब्सिडी जारी हो गई। यह सब्सिडी सभी के लिए अलग-अलग है, जो 11.80 लाख रुपये, 31.50 लाख रुपये और प्रति पशु 80 हजार रुपये के हिसाब से होती है।
-दूसरे की डेयरी में फोटो खिंचवाकर कर रहे खेल
लोन लेने के बाद सब्सिडी के लिए डेयरी खोलने के सबूत देने पड़ते हैं। इसका भी लोन लेने वालों ने तोड़ निकाला हुआ है। वह उन लोगों से संपर्क करते हैं, जो पहले से डेयरी चला रहे हैं। उनकी डेयरी में जाकर फोटो खिंचवाते हैं और उनको लगाकर रिपोर्ट तैयार हो जाती है। इसके आधार पर सब्सिडी खाते में पहुंच जाती है।
-पशुपाल विभाग नहीं करता जांच, बैंक प्रतिनिधि के सहारे चल रहा
लोगों को सब्सिडी भले ही पशुपालन विभाग से मिलती हो, मगर उसके अधिकारी जांच तक नहीं करते हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारी साफ कहते हैं कि वह बैंक प्रतिनिधि की रिपोर्ट के आधार पर सब्सिडी जारी कर देते हैं। इसलिए ही डेयरी के नाम पर लोन लेकर सब्सिडी का यह खेल किया जा रहा है।
-परिचित की डेयरी अपनी बताई
शामली के नीरज ने सरूरपुर की बैंक शाखा से डेयरी के लिए लोन लिया था। निरीक्षण के दौरान जिस डेयरी की तस्वीरें दिखाईं, वह उसके परिचित की निकली। इसकी जांच की गई और अंतिम रिपोर्ट बाकी है।
-लोन लिया, पशु खरीदे ही नहीं
शामली के ही बिरज ने डेयरी के लिए लोन लिया। उसने यह लोन भी पिछले साल लिया था और इसके बाद भी पशु नहीं खरीदे। लोन लेकर रुपये अन्य कार्यों में खर्च कर दिए। यह भी जांच में मामला सामने आया।
डेयरी के नाम पर फर्जी तरीके से लोन लेने के मामले में जांच कमेटी बनाई गई, उस कमेटी में मुझे भी शामिल किया गया। कमेटी की तरफ से जांच रिपोर्ट पशुपालन विभाग को दे दी गई, जिसमें कई ने फर्जीवाड़ा किया हुआ है। उनके स्तर से आगे कार्रवाई होनी है। -राहुल वर्मा, जिला विकास अधिकारी
डेयरी शुरू करने के लिए बैंक से लोन दिया जाता है। बैंक कर्मियों से डेयरी खोलने की रिपोर्ट हमारे पास भेजी जाती है, उस रिपोर्ट के आधार पर सब्सिडी जारी की जाती है। जांच रिपोर्ट के बारे में पता कराया जाएगा। -डॉ. अरविंद त्रिपाठी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी