संपूर्ण समाधान दिवस की असलियत
फरियादियों की व्यथा, शिकायत सुनने के नाम की खानापूर्ति करते है अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। प्रशासनिक अधिकारी संपूर्ण समाधान दिवस में सभी लोगों की समस्याओं का हल कराने का दावा करते हो, लेकिन धरातल पर कुछ और ही है। अधिकांश फरियादी तहसीलों के चक्कर काट रहे है, लेकिन समस्याओं के निस्तारण नहीं होता। आरोप है कि खानापूर्ति कर अधिकारी फरियादियों को टरका देते है।
केस नंबर 1: बामनौली गांव के सामाजिक कार्यकर्ता सोमपाल का कहना है कि गांव में सरकारी भूमि पर बच्चों के खेलने का मैदान था, लेकिन चकबंदी विभाग के अफसरों व कर्मचारियों ने गांव के एक व्यक्ति से सांठगांठ कर मैदान को ही बेच डाला। डेढ़ साल से इस संबंध में लगातार तहसील पर शिकायत की जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
केस नंबर 2: जिवाना गुलियान गांव के नरेंद्र का कहना है कि गांव में तालाब की भूमि पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। लगातार शिकायतों और मामला संज्ञान में होने के बावजूद अधिकारी कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।
केस नंबर 3: बड़का गांव के किसान विनोद कुमार का कहना है कि उनके गांव के जंगल में स्थित 32 निजी नलकूप बड़ौत टाऊन से जोड़ रखे है। इस कारण किसानों को शहरी टाउन के मुताबिक बिल जमा करना पड़ रहा है। कई बार इस समस्या के लिए अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
केस नंबर 4: रमाला गांव निवासी नन्हे ने बताया कि दबंगों ने प्लाट पर अवैध कब्जा कर रखा है। एसओ छपरौली के आदेश किए जाने के बावजूद आज तक प्लाट खाली नहीं हुआ।
ये बोले एसडीएम
बड़ौत। एसडीएम दुर्गेश मिश्र का कहना था कि तहसील पर जो शिकायत प्राप्त हो रही है, उनका मौके पर टीम भेजकर निस्तारण कराने का प्रयास किया जा रहा है। कई जमीन से जुड़े ऐसे मामले है जो कोर्ट में विचाराधीन है।