-श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में जैनु मुनि ने किए प्रवचन
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बड़ौत। जैन संत मुनि विशुभ्र सागर महाराज ने कहा कि सज्जन पुरुष भूलकर भी अनैतिक कार्य नहीं करते। सज्जन विपत्ति के आने पर भी मर्यादा नहीं तोड़ते हैं, पर हित के लिए सज्जन हमेशा प्रयास करते हैं।
जैन मुनि मंगलवार को श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सज्जनों से शत्रु भी प्रभावित हो जाता है। सज्जनों की चर्चा, चर्या दोनों ही धर्मानुकूल होते हैं। सज्जनों के विचार आत्म कल्याण के साथ-साथ प्राणी मात्र के लिए होते हैं, उनकी दृष्टि विशाल होती है। विचारों के अनुसार ही व्यक्ति का जीवन होता है। वर्तमान के विचार ही भविष्य में कार्यरूप परिणत होते हैं। विचार जीवन के दिशा-बोधक होते हैं। विचारों के अनुसार ही व्यक्ति का आचरण होता है। विचारों से ही व्यक्ति की पहचान होती है। विचारों से व्यक्ति के व्यक्तित्व का बोध होता है। श्रेष्ठ एक विचार भी जीवन को परिवर्तित कर देता है। विपरीत एक विचार भी सही-राह से भटका देता है, इसलिए व्यक्ति को विपरीत विचारों से प्रयत्न पूर्वक अपनी रक्षा करना चाहिए। आज युवाओं को सु-विचार की आवश्यकता है, अच्छे विचार, प्रेरक विचार ही श्रेष्ठ-समाज का निर्माण करते हैं। कार्य करने के पूर्व विचार करो। सभा में सुभाष जैन, राजकुमार जैन, अशोक जैन, प्रमोद जैन, वरदान जैन, विमल जैन, जय प्रकाश जैन, जितेंद्र जैन, इंद्राणी जैन, त्रिशला जैन, सुनीता जैन आदि उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि 4 अगस्त को शाम साढ़े बजे से अजितनाथ सभागार में आचार्य विहर्श सागर महाराज की सुशिष्या प्रियंका दीदी और नीतू दीदी का दीक्षा पूर्व गोद भराई का आयोजन किया जाएगा।