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डिजिटल दौर में कम हुआ किताबों का चलन

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मोबाइल और लैपटॉप के अधिक प्रयोग से आंखों पर पड़ रहा असर
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। डिजिटल के दौर में किताबों का चलन कम हो गया है। छात्र-छात्राएं परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबों के बजाए मोबाइल और लैपटॉप को अधिक तव्वजों दे रहे है, जो उनके लिए नुकसानदायक भी साबित हो रहा है। मोबाइल और लैपटॉप का अधिक प्रयोग करने से आंखों के साथ-साथ स्वाभाव पर असर पड़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि अधिक देर तक लैपटॉप या मोबाइल फोन का प्रयोग करने से छात्र चिड़चिड़े हो सकते है और आंखें कमजोर होने की संभावनाएं काफी हद तक बढ़ जाती है।
जरूरत बन गया मोबाइल और लैपटॉप
डिजिटल दौर में मोबाइल फोन और लैपटॉप छात्रों की जरूरत बन गया है। बाजार में किताबों की कमी या अधिक कीमत होना भी छात्रों का पुस्तकों से दूर होने का बड़ा कारण है। - अजय ठाकुर, अभिभावक
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कंप्यूटर आधुनिक तकनीक का हिस्सा
कंप्यूटर आधुनिक तकनीक का हिस्सा है, जबकि किताबी ज्ञान आत्मिक ज्ञान को प्रदर्शित करता है। किताब मात्र भाषा और कंप्यूटर सहायक भाषा की तरह प्रयोग होता है। डिजिटल दौरान में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों का किताबों के बजाए कंप्यूटर और मोबाइल फोन की ओर आकर्षण बढ़ा है।- रोहित कुमार, शिक्षक
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कंप्यूटर से नया सीखते हैं बच्चे
आने वाला समय टेक्नोलॉजी का है। कंप्यूटर व मोबाइल फोन के माध्यम से छात्रों को रोजाना कुछ नया सीखने के लिए मिलता है। जिसके कारण छात्रों का कंप्यूटर और मोबाइल फोन पर पढ़ाई के लिए ज्यादा तव्वजों दे रहे हैं।
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बच्चों में कम हो रही सोचने समझने की शक्ति
किताबों के बजाए लैपटॉप और मोबाइल पर पढ़ाई करने से बच्चों का फिजिकल विकास रुक रहा है। बच्चे चिड़चिड़े हो रहे है और उनके सोचने समझने की शक्ति कमजोर हो रही है। बच्चों में अकेला रहने की प्रवृत्ति बढ़ने के साथ अनिद्रा और जल्दी गुस्सा आने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। जिला अस्पताल में रोजाना एक दो बच्चे काउंसलिंग के लिए आ रहे है। - डॉ अजय कुमार, मनोचिकित्सक जिला अस्पताल
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कम हो रही आंखों की रोशनी और पढ़ाई की ललक
किताबों के बजाए कंप्यूटर और मोबाइल फोन से पढ़ाई करने के कारण बच्चो की आंखों की रोशनी के साथ पढ़ाई की ललक कम हो रही है। लगातार मोबाइल का प्रयोग करने के कारण बच्चों में कम उम्र मे चश्मा लग रहा है और बच्चों में सिर दर्द और मानसिक बीमारी बढ़ रही है। - डॉ विभाष राजपूत, सीएचसी अधीक्षक
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