संवाद न्यूज एजेंसी
छपरौली। बदरखा गांव के प्राचीन शिव मंदिर में रविवार से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। कथावाचक स्वामी प्रकाशानंद महाराज ने राजा दशरथ के घर चार पुत्रों के जन्म की लीला का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि राजा दशरथ को अपनी बढ़ती आयु के बावजूद संतान न होने की चिंता थी। इसलिए उन्होंने अपने राजगुरु वशिष्ठ से सलाह ली और वशिष्ठ ने राजा दशरथ को श्रृंगी ऋषि से यज्ञ करवाने का सुझाव दिया, जो पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है। राजा दशरथ ने श्रृंगी ऋषि के मार्गदर्शन में अयोध्या में यज्ञ किया और फिर यज्ञ से प्रसाद के रूप में खीर प्राप्त हुई। उन्होंने अपनी तीनों रानी को प्रसाद खिलाया, जिसके बाद रानी कौशल्या ने राम, सुमित्रा ने लक्ष्मण, शत्रुघ्न व कैकेयी ने भरत को जन्म दिया। चार पुत्रों के जन्म के बाद अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ जाती है। कथा के दौरान रामचरण जिंदल, मास्टर पवन शर्मा, अंकित कौशिक, वीरेंद्र, सतबीर, सोनू खोखर आदि मौजूद रहे।