बड़ौत डिपो में खड़ी बस की खिड़की के टूटे पड़े शीशे
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कई बसों के टूटे शीशे, ठंड में ठिठुर रहे हैं यात्री
रात के समय बसों में सफर कर पाना मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। रोडवेज बसों की व्यवस्था पटरी से उतर रही है। खटारा बसों में जहां यात्री ठंड में ठिठुर रहे हैं, वहीं यात्रा भी सुरक्षित नहीं है। बसों के खिड़कियां और शीशे टूटे पड़े हैं। सीटों की भी स्थिति अच्छी नहीं है। मजबूरी में यात्रियों को सफर करना पड़ रहा है। परिवहन निगम ने यात्रियों की सुविधाओं को लेकर कतई गंभीर नहीं हैं।
बड़ौत डिपो में निगम की 77 व अनुबंधित 46 बसें हैं। परिवहन निगम की बसों में लोग यात्रा को सुरक्षित मानते थे। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण रोडवेज बसों में सुविधाओं पर सवाल उठने लगे हैं। ठंड पड़ रही है। इतना ही नहीं कोहरा भी शुरू हो गया है। ऐसी स्थिति में जहां यात्रियों को ठंड और हवा से बचाया जाना जरूरी है। वहीं कोहरे में बस और यात्रियों को दुर्घटना से भी बचाना होगा। अगर हम रोडवेज बसों की स्थिति पर गौर करें तो शीशे, खिड़की टूटी पड़ी हैं। कई गाड़ियों में बैक लाइट तक नहीं हैं। फॉग लाइट न होने के कारण बसें कभी भी दुर्घटना का शिकार हो सकती हैं। अमर उजाला ने रोडवेज की बसों में सुविधा और यात्रियों की स्थिति का जायजा लिया। टूटे शीशे और खिड़कियां गवाही देती नजर आई। बसों में ठंडी हवा के कारण ठिठुरे बैठे यात्रियों की स्थिति देखने लायक रही। यात्री सुरेश, जुगल किशोर व स्मृति ने कहा कि विवाह समारोह में शामिल होने के लिए मजबूरी में आए हैं। ठंडी हवा से बुरा हाल हो गया।
ठंड को देखते हुए टूटे शीशे ठीक कराए जाते हैं। जिससे यात्री को ठंड न लग सके। बसों के टूटे शीशे लगभग बदले जा रहे हैं। - नरेन्द्र मान, बस संचालन प्रभारी, बड़ौत डिपो।