एक साल में गोवंशों के लिए 57 हजार 43 क्विंटल भूसे-चारे की है जरूरत
प्रशासन ने अब भूसा व चारा दान करने वालों को सम्मानित करने का फैसला लिया
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। भूसा व चारा महंगा होने के बाद गौ आश्रय स्थलों व संरक्षण केंद्रों में गोवंशों का पेट भरने की समस्या पैदा हो गई हैं। किसानों व आम लोगों ने भूसा या चारा दान करने से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इसको देखते हुए ही प्रशासन ने अब भूसा व चारा दान करने वालों को सम्मानित करने का फैसला लिया है।
जिलेभर में 25 अस्थायी गौ आश्रय स्थल, कान्हा गोशालाएं व दो वृहद गो संरक्षण केंद्र चल रहे हैं। इनमें 3 हजार 226 गोवंशों को रखा जा रहा है। इन गोवंशों के लिए हर साल 57 हजार 43 कुंतल भूसा व हरे चारे की जरूरत पड़ती है। जिसमें कुछ की व्यवस्था शासन से आवंटित बजट से की जाती है। कुछ भूसे की व्यवस्था दानदाताओं के माध्यम से कराई जाती है। पशुपालन विभाग की तरफ से गोवंशों के लिए 1 हजार 565 क्विंटल भूसे व हरे चारे की खरीद की गई है। अलग-अलग गो आश्रय स्थलों में 114 कुंतल भूसा व चारा दान में आ चुका है। वहीं, अब भूसा के दाम 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने के बाद दानदाताओं ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। इस कारण डीएम राजकमल यादव ने लोगों से भूसा व चारा दान करने की अपील की। इसके साथ ही कहा कि गोशाला में भूसा व हरा चारा दान करने वालों को डीएम, एसडीएम, सीडीओ प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेंगे।
सुपुर्दगी में हैं 715 गोवंश
जिले के छह ब्लॉक क्षेत्रों में संचालित गोशालाओं में संरक्षित गोवंश शासन के आदेश पर सुपुर्दगी में दिए गए हैं। जिनके भरण पोषण के लिए पशुपालक को 30 रुपये रोजाना के हिसाब से दिया जाता है। भूसा व चारा महंगा होने के कारण अब पशुपालक भी अफसरों से भरण पोषण का बजट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।