बागपत। यहां न फाइल बनी न टेंडर हुआ और गांवों में काम शुरू भी हो गया। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, मगर यहां अधिकतर गांवों में इस तरह का खेल चल रहा है।
चहेते ठेकेदारों से पहले काम करा लिए जाते हैं और फिर अन्य जिलों में निविदा प्रकाशित कराकर टेंडर छोड़ दिया जाता है।
n भैड़ापुर में आधा काम हो गया, टेंडर 13 अगस्त को छूटेगा : भैड़ापुर गांव में पंचायत घर की चहारदीवारी 3,83,000 रुपये से होगी और इसके लिए निर्माण एक सप्ताह पहले शुरू करा दिया गया। यह काम आधा हो चुका है और इसके लिए टेंडर 13 अगस्त को छोड़ा जाएगा। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से खेल किया जा रहा है। इसके अलावा वहां ओपन जिम परिसर में सीसी कार्य और चहारदीवारी समेत अन्य काम के लिए भी उसी दिन टेंडर छोड़ा जाएगा।
n सिनौली में बिना टेंडर करा दी तालाब की खोदाई : सिनौली गांव में तालाब की खोदाई में पांच लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए गए। वहां भी न फाइल बनाई गई और न टेंडर छोड़ा गया। जब मामला सामने आया तो इसको लेकर काफी हंगामा हुआ।
सचिव से फाइल मांगी गई मगर उसके पास कोई कागज नहीं मिला। इस तरह ही सुल्तानपुर हटाना गांव में नाला निर्माण का टेंडर छोड़े बिना ही नाला निर्माण शुरू कर दिया गया।
n ओढ़ापुर में बिना टेंडर के रिबोर करा दिए हैंडपंप : ओढ़ापुर गांव में लाखों रुपये से हैंडपंप रिबोर किए गए। वहां पहले टेंडर नहीं छोड़ा गया और बाद में टेंडर छोड़ा दिखा दिया गया। वर्क ऑर्डर में फर्म का नाम तक नहीं लिखा गया। इस तरह कई अन्य काम करा लिए गए और उनके टेंडर नहीं छोड़े गए। ऐसा किसी एक गांव में नहीं बल्कि अधिकतर गांवों में सचिव, प्रधान और ठेकेदार मिलकर खेल कर रहे हैं। (संवाद)