- वर्ष 2010 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने के आदेश पर रोक की मांग
- उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने एडीएम को प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ व भाकियू शिक्षक प्रकोष्ठ के बैनर तले शिक्षकों ने कलक्ट्रेट में हंगामा किया। वहां महिला शिक्षक भी काफी संख्या में पहुंची। उन्होंने वर्ष 2010 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने के आदेश का विरोध किया और एडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर आदेश पर रोक लगाने की मांग की।
जिलाध्यक्ष विकास मलिक ने कहा कि वर्ष 2010 तक शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य नहीं थी। वर्ष 2011 में शिक्षा अधिकार अधिनियम 2011 को लागू किया था। यह अधिनियम लागू करते हुए 23 अगस्त 2010 तक के शिक्षकों को अधिनियम से मुक्त रखने की बात कही गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी को अनिवार्य कर दिया है। इससे प्रदेश के चार लाख और जिले के दो हजार शिक्षक प्रभावित होंगे और इससे उनके परिवार के सामने संकट आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री व केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि शिक्षकाें की नौकरी पर संकट न आए। उन्होंने एडीएम पंकज वर्मा को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इसपर रोक लगाने के लिए बदलाव की मांग की गई। इस दौरान महामंत्री योगेश शर्मा, तेजपाल सिंह, रूपेश चौधरी, भावना शर्मा, विनीत पंवार, भारत भूषण, जितेंद्र राठी व जितेंद्र तोमर आदि मौजूद रहे।
- भाकियू शिक्षक प्रकोष्ठ ने भी प्रदर्शन किया
बागपत। भाकियू शिक्षक प्रकोष्ठ भी शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में उतर आया है और इन्होंने भी कलक्ट्रेट में हंगामा किया। जिलाध्यक्ष हरेंद्र कुमार व महामंत्री लोकेश शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है केंद्र सरकार को उसमें बदलाव कर शिक्षकों को राहत देने का कार्य करना चाहिए। क्योंकि इनमें काफी शिक्षक ऐसे है जो टीईटी परीक्षा को पास नहीं कर पाएंगे। उन्होंने एडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान विजेता राणा, अजय खोखर, रीतू रानी, सुनील कुमार, नीरज कुमारी, सुरेखा, कमल पंवार, अनुज कुमार आदि मौजूद रहे।
- शिक्षकों ने यह भी तथ्य रखे
- वर्ष 2001 में नियुक्त शिक्षक इंटरमीडिएट व केवल बीटीसी का प्रशिक्षण लिए हुए हैं। वे टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे।
- शिक्षक पात्रता परीक्षा देने में आयु सीमा 40 वर्ष होने के कारण शिक्षक परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे।
- बीपीएड योग्यता वाले शिक्षक भी टीईटी के लिए पात्र नहीं हैं।
- मृतक आश्रित में नियुक्त हुए शिक्षक भी टीईटी के लिए पात्र नहीं है, क्योंकि उनके पास डिग्री नहीं है।
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2018 में बेसिक शिक्षक की योग्यता बीटीसी निर्धारित की है और बीएड डिग्री वाले शिक्षक भी परीक्षा में आवेदन नहीं कर पाएंगे।
विभिन्न मांगों को लेकर बागपत कलक्ट्रेट में धरना देकर प्रदर्शन करते शिक्षक। संवाद