श्री अजितनाथ धर्मशाला मंडी बड़ौत में मंगल प्रवचन में बोले : मुनि विशुभ्र सागर
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बड़ौत। श्री अजितनाथ धर्मशाला मंडी बड़ौत में मंगल प्रवचन देते हुए मुनि श्री विशुभ्र सागर महाराज ने कहा कि यदि व्यक्ति के भाव अच्छे हैं तो उसका भविष्य अच्छा ही होगा।
उन्होंने कहा कि दीवार पर लगी घड़ी समय बताती है, पर किसी को चलाती नहीं है। गुरु सद्मार्ग का उपदेश देते हैं, पर किसी को चलाते नहीं हैं। पर निमित्त तो निमित्त है, हम स्वयं ही निमित्तों से प्रभावित होते हैं। वस्तु तो तटस्थ रहती है, व्यक्ति उसका प्रयोग करता है। एक व्यक्ति मंदिर जाता है और एक व्यक्ति मदिरालय जाता है। एक व्यक्ति प्रभु भक्ति करता है और उसी समय दूसरा व्यक्ति अशुभ कार्य करता है। अभिप्राय अनुसार व्यक्ति कार्य करता है। जिसे जो चाहिए, वह उसी का अनुसरण करता है। जब-जब चित्त अस्वस्थ हो तो भोजन और स्थान का परिवर्तन करो। शीघ्र ही भाव परिवर्तित होगा, आप स्वस्थ हो जाएंगे। स्थान परिवर्तन करते ही भाव परिवर्तित होते हैं। जीवन में परिवर्तन आवश्यक है। द्रव्य, क्षेत्र, काल, भेष, भोजन और भाषा का भावों पर प्रभाव पड़ता है। सरस भोजन करो, सरस व्यवहार करो। मधुर सम्भाषण करो, शाकाहारी बनो। शब्द वीणा से मधुर बनें, पर शब्द वाण न बनें। शब्दों में अमृत है, शब्दों में शूल है। एक शब्द मित्र को शत्रु बना देता है और एक शब्द शत्रु को मित्र बना देता है। शब्दों को सोच-समझकर, संभल- संभलकर बोलो।
सभा में सुभाष जैन, प्रमोद जैन, सुधीर जैन, राजकुमार जैन, वरदान जैन, हंस कुमार जैन, अनिल जैन, राकेश जैन, शुभम जैन, विवेक जैन, मुकेश जैन, अंकुर जैन मौजूद रहे।