बागपत के दोघट में हत्या के मामले में तिहाड़ जेल में सजा काट रहा सुनील राठी अपनी मां टीकरी की चेयरपर्सन और बसपा की छपरौली विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी राजबाला चौधरी से मिलने टीकरी पहुंचा। अदालत ने मां की बीमारी और बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए पांच घंटे का पैरोल मंजूर किया था। कड़ी सुरक्षा के बीच राठी ने परिवार और क्षेत्र के लोगों से विधानसभा चुनाव के मुद्दे पर बातचीत की।
टीकरी की रंजिश के अलावा सुनील राठी उत्तराखंड में चीनू पंडित से रंजिश को लेकर लंबे समय से सुर्खियों में रहा है। हत्या के मामले में सजा होने के बाद इन दिनों वह तिहाड़ जेल में है। पिछले दिनों मां राजबाला चौधरी की बीमारी और गन्ना भुगतान के लिए बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए अदालत में पैरोल की अर्जी दाखिल की थी। पांच घंटे का पैरोल मंजूर हो जाने के बाद शुक्रवार सुबह दिल्ली पुलिस के सुरक्षा घेरे में सुनील राठी नौ बजकर 45 मिनट पर दोघट थाने पहुंचा। यहां से वह परिवार के लोगों और पुलिस के साथ टीकरी पहुंचा।
सुनील के पहुंचते ही कस्बे के अलावा छपरौली विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों लोग उससे मिलने पहुंच गए। बसपा जिलाध्यक्ष जय कुमार जाटव और मंडल कोऑर्डिनेटर मांगेराम जाटव भी पहुंचे। राठी ने सबसे पहले मां राजबाला चौधरी से मुलाकात की। इसके बाद उससे मिलने पहुंचे लोगों से मंत्रणा की। भीड़ बढ़ी तो राठी परिवार से मिलने चौबारे में पहुंच गया। परिवार के अलावा यहां भी उससे मिलने वालों का तांता लगा रहा। दोपहर करीब पौने तीन बजे टीकरी से वह दोबारा दोघट थाने पहुंचा। इसके बाद वह पुलिस के साथ दिल्ली रवाना हो गया।
छत से लहराया हाथ, चुनाव का फूंका मंत्र
टीकरी पहुंचते ही सुनील राठी समर्थकों से घिर गया। मकान के निचले हिस्से में भीड़ बढ़ी तो वह छत पर पहुंचा। इसके बाद छत से ही हाथ हिलाकर लोगों का आभार जताया। बंद कमरे में लोग आते रहे और राठी ने उनसे छपरौली विधानसभा क्षेत्र के चुनाव पर मंत्रणा की। छपरौली के चुनाव को पिता नरेश राठी का सपना बताकर चुनाव की तैयारी में जुटने के लिए कहा।
हवन में शामिल हुए क्षेत्र के ग्रामीण
परिवार और पुलिस ने सुनील राठी का पैरोल मंजूर होने की बात छिपाकर रखी थी। हालांकि, क्षेत्र के लोगों को पहले से ही न्यौता दिया गया था। सुनील के आने को लेकर संशय बना हुआ था। सुबह आठ बजे हवन में राजबाला चौधरी के अलावा परिवार के अन्य लोग शामिल हुए। इस दौरान मास्टर प्रह्लाद सिंह, कृष्णपाल तोमर और वीरेश तोमर मौजूद रहे।
राठी की थी सख्त निजी सुरक्षा
सुनील राठी घर में मौजूद था, लेकिन घर के दरवाजे पर प्राइवेट सुरक्षा का कड़ा इंतजाम था। मोबाइल और कैमरे प्रतिबंधित कर दिए गए। मीडियाकर्मी पहुंचे तो केवल भीड़ के ही फोटो कर सके। सुनील ने खुद फोटो खिंचवाने से मना कर दिया। यही नहीं, साथ आए पुलिसकर्मी भी कैमरों से बचते रहे। दिल्ली पुलिस की टीम में 12 लोग थे।
इन मामले में चर्चित रहा सुनील राठी
सुनील राठी के पिता नरेश राठी की कस्बे में रंजिश के चलते हत्या कर दी गई थी। इसके बाद दूसरे पक्ष के महक सिंह और मोहकम सिंह की हत्या में सुनील राठी को नामजद किया गया। इसी केस में उसे सजा हुई है। उत्तराखंड में चीनू पंडित के साथ गैंगवार हुई। रुड़की में चीनू पंडित पर हुए हमले में पंडित गैंग के तीन लोग मारे गए थे। इस मामले में सुनील का नाम आया। यही नहीं, बागपत से अमित उर्फ भूरा की फरारी के मामले में भी सुनील राठी का नाम आया था। गैंगवार के बाद ही राठी को रुड़की से तिहाड़ जेल शिफ्ट किया गया था।
14 साल बाद गांव पहुंचा राठी
टीकरी के डबल मर्डर केस में जेल जाने और सजा के बाद करीब 14 साल बाद सुनील राठी अपने गांव पहुंचा। इससे पहले वह बहन की शादी में शामिल होने के लिए गांव आया था।