बोपुरा गांव के किसानों से मिल की स्थापना को खरीदी थी 135 बीघा जमीन, 23 साल भी खाली पड़ी जमीन
किसान परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का था वादा, अब आर्थिक स्थिति बिगड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। बोपुरा गांव में वर्ष 1998 में स्वीकृत चीनी मिल की स्थापना आज तक नहीं हो पाई है। चीनी मिल के लिए त्रिवेणी ग्रुप ने 135 बीघा जमीन किसानों से सस्ते दामों पर खरीदी थी। किसान परिवारों के एक-एक सदस्य को मिल में नौकरी देने का वादा भी किया गया था। मगर, मुजफ्फरनगर की भैसाना मिल से 15 किमी के दायरे में आने से मिल की स्थापना नहीं हो पाई। जिन किसानों ने अपनी जमीन दी थी, अब उन्हें मजदूरी करनी पड़ रही है। इन परिवारों का जीवनयापन मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि जब मिल की स्थापना नहीं होनी है तो उनकी जमीन वापस की जाएं। इससे उनके परिवार का रोजी-रोटी का संकट दूर हो।
15 किमी के नियम के चलते फंसा पेंच
नियमों के अनुसार एक चीनी मिल के 15 किलोमीटर के दायरे के बाहर ही दूसरी मिल की स्थापना हो सकती है। जब बोपुरा गांव में मिल की स्थापना की तैयारी शुरू हुई, तब इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। त्रिवेणी ग्रुप ने जब जमीन खरीद ली तो मुजफ्फरनगर के भैसाना मिल प्रबंधन ने आपत्ति उठा दी। बोपुरा से भैसाना मिल की दूरी 13 किमी है। इसके बाद मिल की स्थापना का प्रस्ताव शासन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।
किसान नूरहसन का कहना है कि गांव में चीनी मिल के अधिकारी आए थे और हमारे सामने जमीन देने का प्रस्ताव रखा था। हमने एक व्यक्ति को नौकरी मिल में देने को कहा था। उन्होंने इस पर स्वीकृति जताई थी। आज तक कोई नौकरी परिवार के किसी भी सदस्य को नहीं मिली।
-किसान यासीन का कहना है कि हमारी जमीन भी चली गई और परिवार के किसी सदस्य को नौकरी भी नहीं मिली। गांव में चीनी मिल की स्थापना भी नहीं हुई। इससे परिवार के गुजारे पर भी संकट खड़ा हो गया। ऐसे में हमारी जमीन कंपनी को वापस करनी चाहिए।
- किसान उम्मेद का कहना है कि हमने चीनी मिल की स्थापना के लिए जमीन इसलिए दी थी कि गांव का विकास होगा। लेकिन मिल नहीं लगी और किसी को नौकरी भी नहीं दी गई। इसके चलते उन्हें संकट का सामना करना पड़ा। कंपनी से हमारी जमीन वापस कर देनी चाहिए।
- किसान अख्तर का कहना है कि यहां चीनी मिल की स्थापना नहीं हुई। त्रिवेणी शुगर मिल ग्रुप को यहां कोई दूसरा कारखाना लगाए, अन्यथा हमारी जमीन हमें वापस दी जाएं। इससे हम जमीन पर खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर सके।