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भगवान श्रीराम ने मनुष्य को जीने की कला सिखाई

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भगवान श्रीराम ने मनुष्य को जीने की कला सिखाई
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खेकड़ा (बागपत)। क्षेत्र के ग्राम डूंडाहेड़ा स्थित श्री बालाजी धाम में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन महा मंडलेश्वर भैया दास महाराज की धर्म बेटी बाल साध्वी राधा देवी ने श्री राम की महिमा सुनाते हुए कहां भगवान राम धरा धाम पर दुष्टों का संहार करने के लिए और भक्तों का उद्धार करने के लिए अवतरित हुए। उन्होंने महाराज दशरथ के घर अवतार लेकर महाराज दशरथ के दुख दूर किए और पूरे नगर वासियों का मन जीत लिया। हर कोई प्रभु राम से मिलना चाहता है। मनुष्य की तो बात क्या कहें देवता भी रूप बदल बदल कर भगवान राम का दर्शन करने आते। जब राम नाम की महिमा ही बड़ी अपार है तो साक्षात राम उनकी महिमा कितनी अपार होगी।
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उन्होंने कहा श्रीराम ने मनुष्य को जीने की कला सिखाई। किस प्रकार जनता से प्रेम करना चाहिए, किस प्रकार माता पिता की आज्ञा का पालन करना चाहिए। किस प्रकार पत्नी का सम्मान करना चाहिए और दुष्ट को कैसे सजा देनी चाहिए। यह सब ज्ञान जनता को दिया। उन्होंने अपने समय पर जब तक धरा धाम पर रहे तब तक सभी को प्रसन्न रखा। राक्षसों को भी अंतिम समय में दर्शन देकर उनका उद्धार किया। भगवान श्रीराम अवध से निकले और कई राज्यों से होते हुए लंका पहुंचे। उन्होंने अवध से लंका तक का शासन एक कर दिया। राजा को भी राम चरित मानस का पाठ करना चाहिए। जनता को आपस में प्रेम से रहना चाहिए, क्योंकि जहां प्रेम होता है वहां भगवान होता है। उन्होंने कहा जहां भगवान होता है, वहां आनंद होता है। वर्तमान समय में लोगों ने भगवान को हृदय से निकालकर अपने हृदय में ईर्ष्या राग देश क्रोध लोभ सबको बसा लिया है। साधु संतों की संगति में रहकर ही मानव कल्याण संभव है। इस दौरान अनेक महिला, पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।
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