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संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। कस्बे में चल रही रामलीलाओं में दशरथ के हाथों श्रवण कुमार की मृत्यु का मंचन किया गया। श्रवण के माता-पिता ने राजा दशरथ को पुत्र के वियोग में मरने का श्राप दिया।
पांडव चौक पर श्री बालाजी रामलीला कमेटी के रामलीला मंचन में श्रवण कुमार के प्रसंग का मंचन हुआ। श्रवण कुमार जंगल में अपने माता-पिता के लिए नदी से पानी लेने जाता है। वहां भूलवश राजा दशरथ के तीर से निकला बाण लगने से श्रवण कुमार की मृत्यु हो जाती है। पता लगने पर श्रवण के माता-पिता राजा दशरथ को भी पुत्र मोह में मृत्यु को प्राप्त होने का श्राप देकर प्राण त्याग देते हैं। बाजार में गांधी प्याऊ पर श्री धार्मिक रामलीला में प्रजा का कष्ट मिटाने के लिए राजा जनक हल चलाते हैं। पृथ्वी से एक घड़े के अंदर बालिका मिलती है। राजा जनक उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार कर उसका नाम सीता रखते हैं। इस दौरान श्रीबालाजी रामलीला कमेटी के प्रधान नितिन जैन, डायरेक्टर राजेश शर्मा, श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के प्रधान दीपक शर्मा, डायरेक्टर तरुण गुप्ता आदि मौजूद रहे।