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Baghpat News: शिव पार्वती विवाह ने स्थापित की वैदिक विवाह परंपरा

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फोटो संख्या 2
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बड़ौत। दंडी स्वामी सत्यदेव आश्रम महाराज ने मंगलवार को श्रद्धालुओं को शिव महापुराण कथा को सुनते हुए शिव पार्वती विवाह को विस्तार पूर्वक सुनाया।
उन्होंने बताया कि मां पार्वती ने अपने पूर्व जन्म सती रूप को अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में भस्म करके समाप्त कर दिया था। बिना भाव के व्यक्ति को बिना बुलाए कहीं नहीं जाना चाहिए। बिना भाव से जाने पर अपमान सहन करना पड़ता है, भले पिता का घर हो। पुनः भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए मां पार्वती द्वारा की गई तपस्या से प्रसन्न होकर योग योगेश्वर भगवान शिव ने प्रकृति के उद्धार के लिए उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने हेतु वर प्रदान किया। इसके बाद भगवान शिव एवं पार्वती का विवाह वैदिक रीति के अनुसार हुआ। इसमें विवाह के आचार्य का दायित्व ब्रह्मा जी द्वारा पूर्ण किया गया, तभी से आज तक वैदिक परंपरा अनुसार विवाह हो रहे हैं।
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डॉ़ दीपक गौतम ने बताया कि पूजन तेल्लू सिंह शर्मा के परिवार द्वारा कराया गया। कथा में आरती ठाकुरद्वारा मंदिर के आचार्य पंडित पवन पांडे ने कराई गई। कथा में डॉ़ रमेश चंद्र वशिष्ठ, पंडित दीपांशु, डॉ़ अखिलेश शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, मंसाराम गर्ग पूनम, सुधा, रीना, रेखा मौजूद रहे।
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