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सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण: इकरा हसन बोलीं- मस्जिद तोड़कर सरकार ने गैरकानूनी काम किया, प्रधानमंत्री से मिलूंगी

Mon, 07 Sep 2026 07:44 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, शामली

सार

Shamli News: कलक्ट्रेट स्थित 100 साल से ज्यादा पुरानी मस्जिद को कोर्ट द्वारा अवैध करार देने पर ध्वस्त करा दिया गया। कैराना सांसद सपा प्रतिनिधिमंडल के साथ सहारनपुर पहुंची। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में पीएम से मिलने का प्रयास करेंगी। 
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सहारनपुर सर्किट हाउस में सपा प्रतिनिधिमंडल के साथ सांसद इकरा हसन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले में कैराना सांसद इकरा हसन ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोमवार को सहारनपुर पहुंचीं इकरा हसन ने कहा कि सरकार के इशारे पर प्रशासन ने जल्दबाजी में मस्जिद को तोड़कर गैरकानूनी काम किया है। इस मामले को लेकर वह उच्च न्यायालय जाएंगी।
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सहारनपुर मस्जिद प्रकरण को लेकर समाजवादी पार्टी के 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कैराना सांसद इकरा हसन भी शामिल हुईं। वह अपने भाई एवं कैराना विधायक नाहिद हसन के साथ सहारनपुर सर्किट हाउस पहुंचीं। इससे एक दिन पहले पुलिस की ओर से हाउस अरेस्ट किए जाने की आशंका के चलते सांसद इकरा हसन अज्ञात स्थान पर चली गई थीं।
 

सर्किट हाउस में इकरा हसन ने कहा कि वह यह जानना चाहती हैं कि आखिर किस आदेश के तहत मस्जिद को तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि वह राज्यपाल और प्रधानमंत्री से भी मिलने का प्रयास करेंगी। उनके अनुसार, मस्जिद को ध्वस्त करने के लिए कोई न्यायालय का आदेश नहीं था।
 

कहा कि मस्जिद को इस तरह तोड़ा जाना बेहद दर्दनाक है। सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश में 22 दिन का समय दिया गया था और उसके तहत मस्जिद को केवल सील किया जाना था। मस्जिद को सील भी किया गया था, लेकिन इसके बाद पर्याप्त समय दिए बिना उसे ध्वस्त कर दिया गया। सांसद ने कहा कि मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले में वह उच्च न्यायालय का रुख करेंगी और पूरे मामले में संबंधित आदेशों की जानकारी सामने लाने का प्रयास करेंगी।
 

इकरा हसन के समर्थन में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष माठ खास शोकेंद्राचार्य ने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कैराना सांसद इकरा हसन के खिलाफ की गई कथित अमर्यादित और आपत्तिजनक टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया।
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शोकेंद्राचार्य ने कहा कि काफी विचार-विमर्श और आत्ममंथन के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है। राजनीति में पद से अधिक महत्वपूर्ण विचार, सिद्धांत और जनता के प्रति जवाबदेही होती है। लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी जनप्रतिनिधि, महिला या सार्वजनिक जीवन में सक्रिय व्यक्ति के प्रति अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। वह इकरा हसन के सम्मान और उनके समर्थन में मजबूती से खड़े हैं।

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