सांसद सत्यपाल सिंह ने एनएचएआई के चेयरमैन के समक्ष यह प्रस्ताव, मिला आश्वासन
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। बड़ौत के बाई ओर बाइपास का निर्माण कराकर इसे इकोनॉमिक कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। इससे रिंग रोड बन जाएगी और यातायात सुगम होगा व जाम से मुक्ति मिलेगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिनौली, मेरठ, सरधना रोड इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ जाएगी। लोगों को इकनॉमिक कॉरिडोर तक जाने के लिए बड़ौत के अंदर से होकर नहीं जाना पड़ेगा। सांसद सत्यपाल सिंह ने एनएचएआई के चेयरमैन डॉ. सुखवीर सिंह संधु के समक्ष यह प्रस्ताव रखा है। उन्होंने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए बाइपास के निर्माण का आश्वासन दिया है।
सहारनपुर तक होंगे छह कट
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर मवी कलां में इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए जंक्शन निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। यहां पहला कट रहेगा। दूसरा कट बागपत-मेरठ हाईवे पर अग्रवाल मंडी टटीरी, तीसरा कट बड़ौत-मेरठ हाईवे पर बड़ौत, चौथा कट शामली में मेरठ-करनाल मार्ग, पांचवां कट पानीपत-खटीमा मार्ग पर शामली में और छठा कट सहारनपुर में दिया जाएगा। बड़ौत का कट बिजरौल की ओर दिया जाएगा। ऐसे में मेरठ रोड से आने वाले लोगों को बड़ौत के अंदर से होकर जाना पड़ेगा। इससे जाम लगने की आशंका बढ़ जाएगी। ऐसा न हो, इसके लिए बिनौली की ओर बाइपास निर्माण कराकर इसे इकोनॉमिक कॉरिडोर से जोड़ने का प्रस्ताव सांसद ने दिया है। इस बाइपास के निर्माण होने से बड़ौत के चारों ओर रिंग रोड बन जाएगी। सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह ने बताया कि एनएचएआई चेयरमैन ने आश्वासन दिया है कि वह इस बाइपास का निर्माण कराएंगे।
नौ चरणों में बनना है इकोनॉमिक कॉरिडोर
दिल्ली से देहरादून तक इकोनॉमिक कॉरिडोर नौ चरण में बनेगा। दो चरण दिल्ली में, चार चरण यूपी में और तीन चरण उत्तराखंड में होंगे। बागपत जिले के 21 गांव से होकर यह एक्सप्रेस-वे गुजरेगा। करीब 41.75 किलोमीटर के टुकड़े का निर्माण होगा। पहले चरण में अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से मवी कलां कट तक पुराने हाइवे का ही चौड़ीकरण किया जाएगा। दूसरे चरण में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के मवी कलां कट से सहारनपुर तक नए कॉरिडोर का निर्माण होगा। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से सहारनपुर बाईपास तक 118 किलोमीटर के हाईवे पर करीब पांच हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। तीसरे चरण में सहारनपुर के गणेशपुर से देहरादून तक हाइवे बनेगा। यह हिस्सा एलिवेटेड, सुरंग और चौड़ीकरण से बनेगा। इसमें करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान के लोगों को लाभ मिलेगा।