खेकड़ा। शिक्षाविद स्वामी कल्याण देव को पुण्यतिथि पर बुधवार को समाजसेवियों एवं शिक्षाविदों ने याद करके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वहीं, उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
स्वामी कल्याण देव प्रबुद्ध शिक्षाविद समाजसेवी थे। बागपत समेत उन्होंने उत्तर भारत की धरा पर कई विद्यालयों को निर्माण कराया। खेकड़ा नगर में आयोजित बैठक में समाजसेवियों, शिक्षाविदों ने उनकी पुण्य तिथि मनाई। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि मां सरस्वती के अनन्य भक्त पदमश्री, पद्मभूषण, ब्रह्मलीन स्वामी कल्याणदेव जी महाराज का जन्म वर्ष 1876 में उनके ननिहाल में बागपत जनपद के गांव कोताना में हुआ था। उनका पालन पोषण मुजफ्फरनगर जनपद के अपने गांव मुंडभर में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1900 में मुनि की रेती ऋषिकेश में गुरुदेव स्वामी पूर्णानंद जी से संन्यास की दीक्षा ली थी। अपने 129 वर्ष के जीवनकाल में उन्होंने 100 वर्ष जनसेवा में गुजारे।
स्वामी जी ने करीब 300 शिक्षण संस्थाओं के साथ गऊशालाओं, वृद्ध आश्रमों, चिकित्सालयों आदि का निर्माण कराकर समाजसेवा में उत्कृष्ट छाप छोड़ी। उनके सामाजिक कार्यों के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति श्री नीलम संजीव रेड्डी ने पदमश्री से सम्मानित किया। स्वामी कल्यादेव जी ने 14 जुलाई 2004 को शुक्रताल में एकादशी के दिन रात्रि 12 बजकर 20 मिनट पर अंतिम सांस ली थी। बैठक की अध्यक्षता शिक्षक संघ के गजे सिंह धामा, संचालन भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष महेंद्र पाल गुप्ता ने किया। बैठक में खेकड़ा युवक मंच अध्यक्ष अनुज कौशिक, रालोद युवा नेता सोनू चौहान, भाजपा नेता पुष्पेंद्र कुमार, ब्रह्मपाल सिंह सभासद, गजेंद्र सिंह, रामकुमार धामा आदि मौजूद रहे।