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रमजान का माह इंसान को समझने का माह : हाफिज

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अग्रवाल मंडी टटीरी। हाफिज अय्यूब ने कहा कि सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम रोजा नहीं है, बल्कि इंसान के जिस्म के हर हिस्से का रोजा होता है। जैसे आंख के रोजे से बुरा मत देखना, कानों से गलत बात नहीं सुनना, मुंह से गलत और बुरी बात न कहना, हाथों से किसी को तकलीफ न पहुंचाना और पांव सिर्फ अच्छाई की तरफ उठने का नाम रोजा है। उन्होंने कहा रमजान का महीना तमाम इंसानों के दुख दर्द और प्यास को समझने का महीना है।
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हाफिज अय्यूब ने कहा कि रोजेदारों में बुरा-भला की पहचानने की समझ होनी चाहिए। रोजे की हालत में भूख और प्यास के एहसास के पीछे एक संदेश यह भी है कि इंसान अपने उन गरीब भाइयों का फिक्र करें, जिनके पास अपना पेट भरने के प्राप्त साधन नहीं है। जिससे उनकी मदद हो सके। इसी तरह रमजान पूरी मानव जाति को प्यार, भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है।
उन्होंने बताया कि रमजान शरीफ एक ऐसा मुबारक महीना है। जिसे अल्लाह ने अपने बंदों पर खास इनाम की शक्ल में उतारा है। जिस महीने में अल्लाह ने अपने महबूब मोहम्मद की उम्मत को हर साल में एक मौका फरमाया है कि ए मेरे बंदों तुमने पूरे साल अपनी जिंदगी को गुनाहों के दलदल में डुबाए रखा, लेकिन मैं एक मौका रमजान के महीने की शक्ल में ऐसा अता करूंगा। इस दौरान सच्चे दिल से की गई तुम्हारी तौबा कबूल भी कर लूंगा और तुम्हारे पिछले सारे गुनाहों को माफ कर दूंगा। हाफिज अय्यूब ने सभी मुस्लिमों से मास्क का इस्तेमाल और दो गज की दूरी का पालन करने का भी आह्वान किया।
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