उम्मीद तो जगाई, अब होनी चाहिए किसानों की भलाई
बागपत। बजट में सरकार ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए बेहतर सुविधाओं का एलान कर गन्ना, गेहूं और आलू की खेती करने वाले पश्चिमी यूपी के किसानों को आय का एक जरिया पेश किया है। इस पर किसानों का कहना है कि बजट ने उम्मीदें जगाई है। आय दोगुनी करने का संकल्प दोहराया गया है लेकिन गन्ना, गेहूं, धान, आलू और सब्जियां उगाने वाले पश्चिम यूपी के किसानों के लिए अलग से योजनाएं बनाई जानी चाहिए थी। सरकार को चाहिए कि किसानों को अलग से बजट दें।
शनिवार को दोपहर के समय सहकारी चीनी मिल में गन्ना लेकर आए किसान मोबाइल पर बजट देखते नजर आए। किसान विनोद कुमार, रविंद्र, मोहित शर्मा और राजेश ने कहा कि बजट में फिर से किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य 2022 तक दोहराया गया। सरकार ने किसान फसल बीमा योजना के लिए 11 करोड़ का प्रावधान किया है। लेकिन बीमा योजना पहुंच हकीकत में किसानों तक होनी चाहिए।
किसान चंद्रपाल और कर्मवीर कहते हैं कि मछली पालन पर बजट में जोर दिया गया है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसका कोई आधार नहीं है। इसकी जगह गन्ना किसानों के लिए प्रावधान होना चाहिए था। किसानों के लिए प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 20 लाख किसानों को सोलर पंप देने का एलान एक बेहतर कदम है।
चमरावल रोड पर अपने खेत की रखवाली के दौरान मोबाइल पर बजट देख रहे किसान विकास कुमार का कहना है कि किसान रेल की बात अच्छी है। इससे दूध, मांस, मछली वाले किसानों और व्यापारियों को लाभ होगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए एलान होना चाहिए था। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पात्र केसीसी स्कीम में शामिल कर लिए जाने से लाभ होगा। सिंचाई और ग्रामीण विकास के लिए तीन लाख करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की बात कही गई है। किसानों का कहना है कि बजट एक उम्मीद जगाता है। अब जरूरी है कि धरातल पर किसानों की भलाई का कार्य किया जाना चाहिए।