बड़ौत। सर्दी के मौसम में पशुओं की अधिक देखभाल की जरूरत है। उनमें जुकाम, निमोनिया, दस्त अफारा, खुरपका-मुंहपका रोग हो सकते हैं। इन समस्याओं से पशुओं को दूर रखना होगा। इसके लिए उन्हें ठंडी हवा से बचाना जरूरी है।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रोहित तोमर ने बताया कि सर्दी लगने से पशुओं की आवाज में बदलाव आ जाता है। सर्द रातों के दौरान पशुओं की अधिक देखभाल की जरूरत होती है। रात के समय तापमान काफी नीचे चला जाता है। खासकर दिसंबर व जनवरी में पशुओं को घर में बांधे। उन्हें कंबल ओढ़ाएं। सर्दियों की शुरुआत में काली जीरी, अदरक का मिश्रण पशुओं को पीसकर सुबह शाम दे सकते हैं। आराम नहीं होता है तो नजदीकी पशु चिकित्सक को दिखाएं। टीका लगने के बाद एक-दो दिन तक पशु दूध कम देता है। इसके बाद पहले जितनी मात्रा में दूध देने लगता है।
निमोनिया से छोटे पशुओं की मौत
सर्दी में छोटे पशुओं में पेशाब रुकने के मामले बढ़ जाते हैं। बछड़े तथा कटड़े में निमोनिया की वजह से मौत हो जाती है। तीन महीने से छोटे पशुओं को मां का दूध सुबह-शाम पिलाना जरूरी है। दूध में थोड़ी चीनी शक्कर मिलाने से ऊर्जा बनी रहेगी। जिससे शरीर में गर्मी बनी रहेगी। इस तरह छोटे पशुओं को सर्दी से बचा जा सकता है।