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मंडी में सब्जियों की आवक बढ़ी तो घट गए दाम

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दूसरे राज्यों की मंडियों में नहीं पहुंच रही सब्जी
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बड़ौत। सब्जी उगाने वाले किसानों की कमर टूट गई है। दूसरे प्रदेशों की मंडियों में सब्जी न जाने के कारण किसानों को स्थानीय मंडियों में सब्जियों के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। यही कारण है कि मंडी में टमाटर पांच रुपये किलो बिक रहा है। आढ़ती बताते हैं कि आवक अधिक होने से टमाटर के दामों में गिरावट आई है। कोराना कर्फ्यू के दौरान इसी प्रकार के रेट रहने की संभावना जतायी जा रही है।
दिसंबर व जनवरी माह में टमाटर 30 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा था। जो फरवरी, मार्च में 15 से 20 रुपये प्रति किलो। अप्रैल माह में फुटकर में 10 रुपये प्रति पहुंच गया है। मई माह में टमाटर के दाम इतने गिरे की सात - आठ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया।
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ये बोले थोक कारोबारी-------
- थोक कारोबारी बिल्लू व इमरान की मानें तो अभी टमाटर की आवक अधिक हो रही है। इससे टमाटर के भाव में और भी कमी आएगी।
हरी मिर्च के अलावा अन्य सब्जियों के दाम भी घटे-----
- पिछले साल कोरोना काल में 30-35 रुपये किलो तक बिकी हरी मिर्च अब दस रुपये किलो बिक रही है। थोक में आठ रुपये किलो पत्ता गोभी और 10 रुपये किलो फूल गोभी बिक रही है, जबकि पिछले साल गोभी 20 रुपये किलो तक थोक में बिकी थी। व्यापारी सुनील व प्रमोद का कहना है कि दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और मध्यप्रदेश में उत्तर प्रदेश की गाड़ियों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। कई बार किसानों की सब्जियों से भरी गाड़ी बार्डर से वापस कर दी गई हैं। जनपद में होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और वैवाहिक कार्यक्रम बंद हैं। ऐसे में सब्जियों के ग्राहक नहीं मिल पा रही है। इसलिए सब्जियों की कीमत हो गई हैं।
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