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सेना में भर्ती के लिए शूटरों के प्री सलेक्शन ट्रायल शुरू

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जौहड़ी की बी.पी. सिंघल रेंज पर ट्रायल के लिए आवेदन करते शूटर। - फोटो : BARAUT
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एमआईआरसी अहमदनगर की स्पोर्ट्स ब्याज कंपनी ने कराया आयोजन
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जौहड़ी की बी.पी. सिंघल रेंज पर 20 तक चलेगा शूटरों का ट्रायल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली (बागपत)। भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षण केंद्र बीपी सिंघल इंडोर शूटिंग रेंज जौहड़ी परिसर में मंगलवार को एमआईआरसी अहमदनगर की ब्याज स्पोर्ट्स कंपनी के लिए शूटरों की तीन दिवसीय प्री सलेक्शन ट्रायल का शुभारंभ हुआ। ट्रायल में प्रथम दिन 100 से अधिक शूटरों ने हिस्सा लिया।
प्री सलेक्शन ट्रायल का शुभारंभ शूटिंग रेंज के संस्थापक डॉ. राजपाल सिंह और एमआईआरसी अहमदनगर से आए नायब सूबेदार चंद्रवीर सिंह ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। ट्रायल में प्रथम दिन यूपी और उत्तराखंड से आठ से 14 वर्ष तक आयु के करीब 120 प्रशिक्षु शूटरों ने ट्रायल में भाग लिया। सांई की कोच नीतू श्योरान ने बताया ट्रायल केवल प्रशिक्षु शूटरों के लिए हैं यह 20 अगस्त तक चलेंगे। एयर रायफल वर्ग में 654 में से 580 और एयर पिस्टल में 600 में से 540 अंक प्राप्त करने वाले शूटरों की शारीरिक परीक्षा भी होगी। इसके बाद चयनित शूटरों का 20 से 23 सितंबर के बीच एमआईआरसी अहमदनगर में फाइनल ट्रायल होगा।
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ट्रायल के दौरान चयनित शूटरों को स्पोर्ट्स ब्याज कंपनी रहना, खाना, पढ़ाई, शूटिंग प्रशिक्षण आदि निशुल्क कराएगा और साढ़े 17 वर्ष आयु के बाद उन्हें भारतीय सेना में योग्यता के अनुसार भर्ती कर पद दिया जाएगा। ट्रायल में खेलो इंडिया कोच अमोल प्रताप सिंह, परवेज, इंद्रपाल, विवेक आत्रेय शर्मा, कुलदीप, ऋषभ, सचिन, दीक्षा श्योरान, मनीष ऑफिसियल रहे। सोहन पाल प्रधान देवेंद्र, विपिन दांगी, फारुख अली, विपिन राणा, बिट्टू खान, हरिओम, वाजिद अली, शाहरुख, आशु आदि का सहयोग रहा।
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सेना में ओलंपिक के लिए तैयार किए जाते हैं शूटर
बिनौली। क्षेत्र के गांव जौहड़ी में स्थित बी.पी. सिंघल इंडोर शूटिंग रेंज पर प्री सलेक्शन ट्रायल के लिए एमआईआरसी अहमदनगर से तीन सदस्यीय टीम में आए नायाब सूबेदार चंद्रवीर सिंह ने प्रेसवार्ता में बताया ग्रामीण आंचल में एक से बढ़कर खेल प्रतिभा हैं, जो सुविधाओं के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाती हैं। केंद्र व प्रदेश सरकार भी खेलों को बढ़ावा दे रही है। सेना का उद्देश्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा को चमकाने का अवसर मिले, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों के आठ से 14 वर्ष तक आयु के शूटरों को ट्रायल द्वारा चयनित कर सेना उन्हें अपने हिसाब से शूटिंग प्रशिक्षण देकर ओलंपिक के लिए तैयार करती है, ताकि वह ओलंपिक में पदक जीतकर भारतीय सेना और राष्ट्र का गौरव बढ़ा सके।
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