आतिशबाजी के धुएं ने बागपत की हवा में घोल दिया जहर
बागपत/बड़ौत। पांच करोड़ की आतिशबाजी ने जिले की हवा में जहर घोल दिया। एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 337 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही पराली जलाने से भी हवा की सेहत खराब हो रही है। अगले तीन-चार दिन तक सुबह के समय स्मॉग छाए रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने औसत एक्यूआई का जो डाटा जारी किया है, उसमें भी बागपत की हवा को सांस के लिए खतरनाक बताया गया है। डॉ. यशवीर सिंह का कहना है कि खास तौर से सांस और दिल के रोगी मास्क पहनकर घर से निकलें।
दीपावली इस साल भी खूब धूमधाम से मनाई गई। जमकर आतिशबाजी हुई। सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए एनसीआर क्षेत्र में दीपावली पर पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। मात्र दो घंटे के लिए ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। लेकिन इन आदेशों की खूब धज्जियां उड़ाई गईं।
आतिशबाजी है जानलेवा
नगर मेें पटाखे बनाने वाले मेहरबान ने बताया कि आतिशबाजी में एल्युमीनियम, एटीमनी सल्फाइड, आर्सेनिक व उसका मिश्रण, बेसियम नाइट्रेट, केडियम, पोटेशियम नाइट्रेट, सल्फर डाई आक्साइड आदि रसायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार का कहना है कि इन रसायनिक पदार्थों से बनने वाले पटाखों के धुएं से दमा एवं सांस रोग, कैंसर, गठिया, हड्डियों में दर्द, एलर्जी, कान की सुनने की क्षमता कम होना, हाई ब्लड प्रेशर, पाचन तंत्र कमजोर होना, किडनी को नुकसान पहुंचना आदि समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा कोख में सांस ले रहे बच्चों का भी शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध हो सकता है।