दीपावली पर विधि पूर्वक पूजन से होती है मनोकामना पूरी
बड़ौत (बागपत)। दीपावली पर विधिपूर्वक पूजन करने से मनुष्य की सभी मनोकामना पूरी होती है। रातभर मां लक्ष्मी की आराधना से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
रेलवे रोड स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर के पंडित आकाश भारद्वाज और पंचवटी मंदिर के पुजारी पंडित कुंदन भारद्वाज ने बताया कि दीपावली पर श्री गणेश एवं माता लक्ष्मी की पूजा करने से मनुष्य को मनो वंचित फल की प्राप्ति होती है। पूरे वर्ष घर में लक्ष्मी जी का वास रहता है। आराधना के साथ अपने गुरू द्वारा प्रदत्त मंत्र का निरंतर जप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता है। पूरी रात जागरण करते हुए जो मनुष्य मां लक्ष्मी का ध्यान करता है, उसके घर में पूरे वर्ष लक्ष्मी माता का वास रहता है। विशेष रूप से घर की महिलाओं का सम्मान करने वाले व्यक्ति के घर से मां लक्ष्मी कभी नहीं रूठती है। दीपावली की रात मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
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ऐसे करें पूजा-अर्चना
बड़ौत। सर्वप्रथम पूजा के लिए स्थान का चयन करें। वह स्थान पवित्र होना चाहिए। पूरब दिशा को पूजा के लिए शुभ माना जाता है। पूजा के उपयोग की जाने वाली सामग्री का संग्रह सावधानी पूर्वक करना चाहिए। शुभ स्थान, शुद्ध भाव से पवित्र वस्तुओं विधिपूर्वक की पूजा मनोवांछित फल प्रदान करती है। पूजा कराने के लिए ब्राह्मण को निमंत्रण देना चाहिए। ब्राह्मण के न मिलने पर स्वयं भी पूजा कर सकते हैं। पूजा की सामग्री अपने सम्मुख रखकर पीतल की थाली में स्वास्तिक एवं श्री लिखकर थाली चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। उसमें भगवान श्री गणेश और मां लक्ष्मी नारायण को स्थापित करें। श्री गणेश को पुष्प अर्पण कर नमस्कार करें। एक पुष्प नवग्रह का ध्यान कर अर्पित करें। मां लक्ष्मी का वस्त्र रूप में लाल चुनरी चढ़ाएं। मां को रोली से सुंदर तिलक कर मां को अक्षत अर्पित करें और एक लाल फूल चढ़ाएं। मां को धूप, दीपक दिखाएं और मावा से बनी मिठाई का भोग लगाएं। इसके साथ ही दो लाल फल अर्पित करें। पान के साथ दो लौंग, दो इलायची और एक सुपारी को चढ़ा सकते। मां के चरणों में दक्षिणा अर्पण कर प्रार्थना करें। उसके साथ किसी पात्र में 11 या 21 दीपक रखकर पूजा करें। हाथ में कलावा व खील लेकर तीन बार दीपक के ऊपर से घुमाकर सभी दीपक के ऊपर चढ़ा दे। अंत में महालक्ष्मी की आरती उतारें।