बागपत। पेंशनर्स व उनके आश्रितों का घरों में श्राद्ध कर दिया गया, मगर पेंशन के लिए उनको कागजों में जिंदा रखा गया। उनके खातों में पेंशन जाती रही और परिजनों ने उनके मरने की सूचना नहीं दी। जांच में ऐसे 128 लोगों के मरने का पता चला तो 1.37 करोड़ रुपये की रिकवरी की गई।
सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों व उनके आश्रित का अप्रैल 2024 से अप्रैल 2026 तक निधन होने के बाद भी कोषागार में परिजनों ने सूचना नहीं दी, इसलिए उनके खाते में पेंशन पहुंचती रही। इनकी जांच कराई गई तो पता चला कि 128 पेंशनर्स की मौत हो चुकी है। उनकी पेंशन रोकने के साथ ही रिकवरी के लिए नोटिस जारी किया गया।
इनमें से अधिकतर ने पेंशन की रकम लौटा दी और जिन्होंने नहीं लौटाई है, उनको दोबारा नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद भी वह रुपये नहीं लौटाते हैं तो उनके खिलाफ आगे की प्राथमिकी दर्ज कराने से लेकर अन्य कार्रवाई की जाएगी।
मां की मौत हुई तो मौसी को लेकर आया
बड़ौत के एक सेवानिवृत्त कर्मी की मौत के बाद आश्रित के तौर पर उनकी पत्नी के नाम से पेंशन शुरू हो गई। जब उनकी पत्नी की भी मौत हो गई तो पेंशन लेने के लिए उनका बेटा अपनी मौसी को लेकर कोषागार में पहुंचा। जहां कागजी कार्रवाई के दौरान उनको शक हुआ तो उन्होंने काफी सवाल पहुंचे और उससे पता चला कि वह फर्जीवाड़ा करने आए थे। उनको इस तरह से करने पर कार्रवाई की चेतावनी देकर छोड़ा गया।
सेवानिवृत्त कर्मी की मौत के बाद ये होते हैं आश्रित
पेंशन सबसे पहले उसको मिलती है, जो सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त होते हैं। उनकी मौत के बाद पत्नी को आश्रित मानते हुए उनको पेंशन दी जाती है। उनकी भी मौत हो जाती है तो 25 वर्ष से कम उम्र के अविवाहित बेटे व बेटी व विधवा बेटी भी पेंशन के हकदार होते हैं।
वर्जन
पेंशनर्स की मौत के बाद भी परिजन इसकी जानकारी नहीं दे रहे हैं। जांच में इस तरह के 128 लोगों का पता चला है कि उनकी मौत हो चुकी है और उनके खाते में पेंशन चली गई थी। उसकी रिकवरी की जा रही है और अभी तक 1.37 करोड़ रुपये की रिकवरी हो चुकी है।
-मनीष सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी