बागपत। पंचायत घरों में बैठकर सचिवों ने बुजुर्गों को कागजों में मार दिया। पेंशन बंद होने पर बुजुर्गों को मृत घोषित किए जाने के बारे में पता चला तो उनको अधिकारियों के पास जाकर खुद के जिंदा होने के सबूत पेश करने पड़े।
इसके बाद उनकी पेंशन शुरू कराने की कार्रवाई की गई और उनको मृत दर्शाने वालों के खिलाफ जांच शुरू कराई गई।
यहां ऐसा कोई एक मामला नहीं है, बल्कि हर महीने इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। सचिवों की इस लापरवाही का खामियाजा बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। उनको अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। चक्कर काटने के बाद ही मृत दर्शाए गए कई बुजुर्ग कागजों में जिंदा हो चुके हैं तो कुछ जिंदा होने के लिए लाइन में लगे हुए हैं। इस तरह बुजुर्गों को केवल परेशानी ही नहीं हो रही, बल्कि एक साल तक पेंशन के लाभ से वंचित भी रहना पड़ा।