बच्चे शिफ्ट होने पर दोबारा हिम्मत मिली। गोपालपुर खड़ाना गांव निवासी प्रमोद की पत्नी अनिता ने पहले बच्चे को जन्म दिया। वह बताते हैं कि आग लगने पर धुआं नीचे बढ़ता जा रहा था और उसे देखकर वह इधर-उधर दौड़ते रहे। वहां एंबुलेंस आई और उसमें बच्चों को दूसरे अस्पताल में भेजा गया।
पिछौकरा निवासी सलमा ने भी चार दिन पहले बच्चे को जन्म दिया। वहीं बड़ौत निवासी शुभम की पत्नी ने चार दिन पहले बच्चे को जन्म दिया था। इसके अलावा नर्सरी में तितरौदा निवासी नरेन्द्र, भगवानपुर निवासी सुरेशपाल, सरूरपुर निवासी अनुज, गांगनौली निवासी वसीम खान, बिहारीपुर निवासी अमित, बागपत निवासी वसीम, असारा निवासी अंजुम समेत 16 लोगों के बच्चे भर्ती थे।
जब तक यह सभी बच्चे दूसरे अस्पताल में शिफ्ट नहीं हुए, तब तक उनके परिवार वालों की हालत खराब रही। क्योंकि इनमें से कई दंपती को काफी मन्नतों के बाद कई साल बाद बच्चे का सुख मिला था।
बाल रोग विशेषज्ञ के साथ पहुंचे स्टाफ ने दिखाया हौंसला
आस्था अस्पताल में आग लगने से भगदड़ मच गई। इस दौरान सूचना पर पहुंचे बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. अभिनव तोमर व उनकी टीम में शामिल डाॅ. अमन नागर, डाॅ. रिजवान, नर्सिंग इंचार्ज साक्षी, सिस्टर शिवानी, गुलशना, प्रियांशी व रिजवाना ने वार्ड में भर्ती नवजात बच्चों को ऑक्सीजन व अन्य उपकरण लगाकर दूसरी जगह सुरक्षित भर्ती कराया।