बागपत। एक दिन पिता के नाम। सबके जीवन में पिता की अहम भूमिका होती है। आगे बढ़ने के लिए पिता प्रेरणा बनते हैं तो पहले मार्गदर्शक भी होते हैं। उंगली थामकर बच्चों को चलना सिखाने वाले पिता जीवनपर्यंत यादों में बसते हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां अपनी कामयाबी का श्रेय देती हैं अपने पिता को।
गांठ बांध ली पिता से मिली समाजसेवा की सीख
बागपत। लायंस क्लब के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता विजय पाल तोमर का कहना है कि उन्हें समाजसेवा की प्रेरणा पिता से मिली। नगर के मुन्ना लाल एंक्लेव में रह रहे तोमर बताते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय चौधरी कटार सिंह कासिमपुर खेड़ी गांव के किसान थे। समाजसेवा के क्षेत्र में उन्होंने कार्य किया। गांव और देहात के लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनकी प्रेरणा से ही वह अधिवक्ता बनें और इसके बाद समाजसेवी संगठनों से जुड़ गए। लायंस क्लब में भी वह पिता की प्रेरणा से ही जुड़ें।
पिता ने सिखाया आगे बढ़ना
फोटो संख्या-
बागपत। जिला पिछड़ा कल्याण वर्ग अधिकारी तुलिका शर्मा मूल रुप से हाथरस की रहने वाली हैं। उनका कहना है कि उन्हें लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा उनके पिता सुरेंद्र कुमार शर्मा से मिली है। उन्होंने अपने पिता से ही अपना काम ईमानदारी से करने व गरीबों की मदद करना सिखा है। पिता भारतीय पोर्टल सर्विस से सेवानिवृत्त हैं। कहना है कि लड़की होते हुए भी पिता ने उन्हें भरपूर सपोर्ट किया। पिता ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा के साथ-साथ सही रास्ता चुनने व अपना काम और लक्ष्य के लिए ईमानदारी से काम करने के लिए प्रेरित किया।
पिता ने कभी नहीं समझा बेटे और बेटियों में अंतर
बड़ौत। बाल विकास परियोजना अधिकारी शारदा बताती हैं कि उनके जीवन में पिता की अहम भूमिका हैं। वह आज जो भी हैं अपने पिता लख्मी सिंह की बदौलत ही हैं। बुलंदशहर की रहने वाली शारदा बड़ौत और छपरौली ब्लाक में बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। वह बताती हैं कि उनके पिता मौसम विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत रहे। शिक्षा के लिए पिता ने बढ़ावा दिया। परिवार में बेटे और बेटियों में कभी फर्क नहीं किया। शिक्षा के बाद उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित किया। पिता का कहना है कि सत्य मार्ग पर अपना कर्म करते रहो, परिणाम अच्छे ही निकलेंगे।
पहले पिता ने कमाया नाम, अब बेटा कबड्डी का सितारा
बड़ौत। मलकपुर गांव के अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी नितिन तोमर कहते हैं कि उनकी कामयाबी में उनके पिता जितेंद्र तोमर की अहम भूमिका है। बचपन से ही पिता ने खेलों के लिए प्रोत्साहित किया। उनके पिता जितेंद्र तोमर कबड्डी और कुश्ती में राज्य स्तर के खिलाड़ी रहे। पिता खेल और खिलाड़ी का महत्व जानते थे, जिस कारण उन्हें आसानी हो गई। कबड्डी खेलना शुरू किया तो पिता ने ही बारीकियां सिखाई। आज वह जो कुछ भी हैं अपने पिता की बदौलत ही हैं। पिता से अनुशासन और धैर्य के साथ आगे बढ़ते की सीख मिली।
पिता की प्रेरणा से ही बन सका डॉक्टर
बड़ौत। नगर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ शशांक शर्मा का कहना है कि पिता डॉ जगसोरण शर्मा से प्रेरणा लेकर ही वह डॉक्टर बन सकें। जब वह छोटे थे तो एक व्यक्ति की तबियत खराब हो गई। उस दौरान चिकित्सक बड़ौत में कम थे, मेरठ या दिल्ली से आते थे। ऐसे में मरीजों को काफी दिक्कतें होती थी, तब पिता ने मुझे चिकित्सक बनकर मरीजों की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। पिता की सीख ने उनकी हमेशा मदद की और आगे बढ़ाया।
किसान पिता ने बेटी को बनाया पहलवान
बड़ौत। अंतरराष्ट्रीय महिला मल्ल मलकपुर गांव निवासी आरजू का कहना है पिता की प्रेरणा की बदौलत ही वह कुश्ती जैसे खेल में आगे बढ़ सकी है। किसान पिता ने घर मेें अखाड़ा बनाया और उन्हें कुश्ती के प्रति प्रेरित किया। इसकी बदौलत ही उन्हें और उनकी बहन को खेल के प्रति लगन लगी और वह आगे बढ़ सकीं। उन्हें अपने पिता से कठोर परिश्रम, अनुशासन, लगन, ईमानदारी से आगे बढ़ने की सीख मिली।