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संगीत हमारे लिए शौंक, सुकून और जुनून

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बागपत। संगीत और गायन के क्षेत्र में जिले की प्रतिभाओं ने नाम रोशन किया है। यहां के कलाकार राष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए है। इन कलाकारों का कहना है कि संगीत उनके लिए शौक, सुकून और जुनून हैं। कला के क्षेत्र में कार्य करने से मन को शांति मिलती है। संगीत के प्रति दीवानगी ने ही आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
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‘नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का’.. से प्रमोद ने बनाई पहचान
बागपत। नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का, प्यासे को पानी पिलाया नहीं...जैसे दिल छूने वाले भजन गाने वाले प्रमोद अजमेरिया जिले की मिट्ठी की खुशबू हैं। धनौरा पुट्ठी गांव के रहने वाले प्रमोद बताते हैं कि बचपन से गाने का शौक था। स्कूल के कार्यक्रमों से उत्साह मिला। साल 2000 में आए भजन ‘नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का’ की कामयाबी ने हौसला दिया और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं दिखा। संगीत एक साधना है। जो भी युवा इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, उन्हें सतत साधना करनी होती है। एक दिन में किसी भी क्षेत्र में कामयाबी नहीं मिलती।
रेणुका पंवार ने बनाई पहचान, गोविंदा ने सराहा
बागपत। कला और संगीत के क्षेत्र में खेकड़ा की बेटी रेणुका पंवार ने पहचान बनाई है। हरियाणवी और पंजाबी सिनेमा में कईं हिट गाने और भजन रेणुका पंवार ने दिए हैं। सपना चौधरी के लिए उन्होंने गाने गए। रेणुका कहती है कि उन्होंने बस शुरूआत की है। बचपन से गाने का शौक था, मां और भाई विक्की पंवार ने आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। संगीत हमेशा सीखते रहने की एक प्रक्रिया है। इसमें कभी कोई कंपलीट नहीं हो सकता। वह बॉलीवुड में गायिकी करना चाहती है। कई लोगों से मुलाकात हुई है। अभिनेता गोविंदा से मुलाकात हुई। जब उसकी आवाज को सराहा जाता है तो बेहद खुशी होती है।
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संगीत की शिक्षा के प्रति रुझान कम
बागपत। एसपीसी कॉलेज के प्राचार्य डॉ अनिल चौहान का कहना है कि उनके यहां संगीत विषय है। लेकिन प्रवेश सिर्फ 10 ही हैं। संगीत की शिक्षा के प्रति उम्मीद के हिसाब से रुझान नहीं है।
पारंपरिक संगीत की ओर रुझान कम
बागपत। देहात क्षेत्र की पारंपरिक संगीत में भजन और रागिनी शामिल रहे हैं। लेकिन युवाओं का रुझान अब रागिनी की की ओर कम है। कलाकारों की संख्या भी उंगलियां पर रह गई है। आर्य भजनोपदेशक सहदेव सिंह बेधड़क का कहना है कि संगीत की लंबे समय तक साधना करनी पड़ती है। युवाओं के पास धैर्य नहीं है। यही वजह है कि पारंपरिक संगीत या गायिकी में लोग न के बराबर आ रहे हैं।
उलट होती है हकीकत
बागपत। भजन गायक प्रमोद अजमेरिया कहते हैं कि रियलिटी शो में प्रतिभाओं को बढ़ाने का दावा किया जाता है। मगर, हकीकत इसके उलट है। जो प्रयास दिखाया जाता है, अगर वहीं किया जाए तो रियलिटी शो सबसे बढ़िया है। लेकिन इसकी हकीकत अलग होती है।
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