बागपत में श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में शुक्रवार को रथ और घट यात्रा के साथ पंचकल्याणक समारोह का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गांधीवादी नेता सुब्बाराव ने कहा कि संसार में सभी जीवों में मनुष्य के पास ही विवेक है। भगवान महावीर ने सभी जीवों में परस्पर भाईचारे और अहिंसा की सीख दी थी।
रथ यात्रा में भगवान के सारथी की बोली जगन्नाथ, प्रमोद कुमार जैन, कुबेर की बोली राजकुमार, नीरज जैन और चंवर की बोली आनंद प्रकाश, लवी जैन की छुटी। इसके उपरांत बैंडबाजों के साथ स्वर्ण रथ में विराजमान भगवान की यात्रा निकाली गई, जो नगर के गांधी बाजार, बड़ा बाजार, कोर्ट रोड होते हुए कार्यक्रम स्थल मुन्नालाल एंकलेव में संपन्न की गई। कार्यक्रम स्थल पर जैन मुनि विहर्ष सागर महाराज, प्रतिष्ठाचार्य अजीत शास्त्री, सतीश शास्त्री ने विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की। श्यामलाल, स्नेहलता ने झंडारोहण और जिनेंद्र कुमार, पुनीत जैन, विनीत जैन द्वारा मंगल कलश स्थापित किया गया। सभी इंद्र और इंद्राणियों ने मुनि के सानिध्य में योग मंडल विधान किया और 256 अर्घ्य चढ़ाए गए।
इस मौके पर मुख्य अतिथि सुब्बाराव ने कहा कि भगवान महावीर के सिद्धांत को मानते हुए महात्मा गांधी ने देश को आजाद कराया। कहा कि हमारा धर्म और जाति चाहे कोई भी हो, मगर हम सब एक हैं। जैन मुनि विहर्ष सागर महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि भगवान के गर्भ में आते ही रोग और शोक दूर हो जाते हैं। चारों ओर फसलें लहलहाने लगती है। लोगों के कारोबार में उन्नति होने लगती है। पंचकल्याणक पर्व में पूरी तरह से वहीं प्रक्रिया दिखाई जाती है जो कि एक आम आदमी से भगवान बनने की क्रियाएं हैं।
जिन क्रियाओं के द्वारा तीर्थंकर बने। किस प्रकार उन्होंने आत्मा पर विजय प्राप्त की, तप किया और मोक्ष की प्राप्ति की। उन्होंने पंचकल्याणक पर्व की क्रियाओं को मनोरंजन न समझने अपितु इससे अपने जीवन को बदलने के लिए सीख लेने का आह्वान किया। इस मौके पर समाज के अध्यक्ष प्रह्लाद जैन, संदीप जैन, शिखर चंद जैन, प्रदीप जैन, पंकज जैन, पीयूष जैन, सुधीर जैन, पुनीत, धीरज, हरिश्चंद्र जैन सहित काफी श्रद्धालु मौजूद रहे।