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शब-ए-कद्र की रात अल्लाह खोल देते है रहमतों का दरवाजा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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अग्रवाल मंडी टटीरी। रमजान की एक ऐसी रात भी है, जिसे अल्लाह ने इबादत के लिए हजार रातों से बेहतर बनाया है। इस रात को शब-ए-कद्र की रात कहते हैं। इसमें एक रात है जो हजारों महीनों से बेहतर है।
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मौलाना हाजी जहीर अहमद ने तकरीर में कहा कि मुकद्दस रमजान के महीने अल्लाह की रहमत, बरकत बंदों पर बरसती है। शब ए कद्र की यह रात रमजान के 21, 23, 25 व 27वीं रात में से कोई एक होती है। शब ए कद्र में ही अल्लाह ने कुरआन पाक नाजिल (उतारा ) किया था। इसलिए यह रात खासतौर पर इबादत वाली रात मानी जाती है। शब ए कद्र की कौन सी रात होती है, इसका स्पष्ट इशारा नहीं दिया गया। इतना जरूर बताया कि इस रात की दुआ को अल्लाह जरूर कबूल फरमाता है। उन्होंने कहा कि इन रातों को जितना हो सके, इबादत करनी चाहिए। रमजान की इन रातों के महत्व को देखकर बहुत से लोग शब-ए-कद्र से पहले ही एतकाफ यानी एकांत साधना में चले जाते हैं और ईद के चांद देखने के बाद ही बाहर आते हैं। शुक्रवार शाम से ही मस्जिदों में कुछ रोजेदार एतकाफ में बैठ गए थे। हदीस में बयान है कि एतकाफ पर जाने वालों के जरिए अल्लाह पूरी आबादी के लिए रहमत के दरवाजे खोल देता है। औरतें भी घरों के किसी खास और एकांत वाले स्थान को एतकाफ के लिए चुन सकती हैं।
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