बागपत। दीपावली पर्व को लेकर लोगों में असमंजस है और त्योहार को लेकर विद्वानों के मत अलग-अलग हैं। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि दीपावली के त्योहार में प्रदोष काल को प्रधान माना जाता है। इस बार 31 अक्तूबर को शाम 3 बजकर 52 मिनट पर अमावस्या तिथि शुरू होगी और एक नवंबर को शाम 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। 31 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 38 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। जिससे 31 अक्तूबर को ही दीपोत्सव का त्योहार मनाना शास्त्र संगत है।
दीपावली त्योहार को लेकर मंगलवार को ज्योतिषाचार्यों की वर्चुअल बैठक हुई। इसमें ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री के कार्यालय पर दीपावली के त्योहार को लेकर बैठक हुई। इसमें ज्योतिषाचार्याें ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार दीपावली के त्योहार पर रात्रि में अमावस्या तिथि होने की अनिवार्यता है। 31 अक्तूबर को रात्रि में अमावस्या और प्रदोष काल में शाम 7 बजकर 27 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक वृष लग्न होने से शुभ संयोग बन रहा है।
उन्होंने कहा कि 29 अक्तूबर को धनवंतरी जयंती, 30 अक्तूबर को नरक चतुर्दशी और 31 अक्तूबर को दीपावली का त्योहार मनाना शास्त्र संगत है। इसके अलावा दो नवंबर को रात्रि 8 बजकर 22 मिनट तक प्रतिपदा तिथि होने से गोवर्धन और तीन नवंबर को भैयादूज का पर्व मनाया जाएगा। इस मौके पर पंडित पवन पांडेय, पंडित सीताराम, राम लखन त्रिपाठी, अनुज शास्त्री सहित अन्य रहे।