बागपत। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के सर्वे पर आए दिन सवाल उठाया जा रहा है। कईं गांव ऐसे हैं, जिनमें किसी का गोल्डन कार्ड नहीं बना है। ग्रामीणों का कहना है कि जिसकी वजह से यह चूक हुई, उसकी जांच होनी चाहिए। सरकारी योजना का मखौल उड़ाया गया है।
सैदपुर खुर्द गांव के हरपाल सिंह का कहना है कि सर्वे में धांधली हुई है। सर्वे करने वालों की जांच होनी चाहिए। उनका छोटा सा गांव है, लेकिन एक भी व्यक्ति का चयन नहीं किया गया है। यह बड़ी लापरवाही है।
सैदपुर कलां के प्रधान राहुल का कहना है कि योजना का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं किया गया है। धरातल पर ऐसे बीस से अधिक परिवार रह गए हैं, जो वास्तव में योजना के पात्र हैं। लेकिन इन परिवारों को लाभ नहीं मिला है।
केस-1 : ढिकौली गांव के रणवीर सिंह का कहना है कि वह योजना के पात्र हैं। सर्वे में नाम नोट कराया था, लेकिन लाभ नहीं मिला।
केस-2 : बड़ौत के मोहित सैनी का कहना है कि पात्रों के कार्ड बनने चाहिए। जिन लोगों ने सर्वे किया, उनकी जांच होनी चाहिए।
केस-3 : ढिकौली के सोनू का कहना है कि योजना अच्छी है, लेकिन इसमें सभी पात्र लोगों को शामिल किया जाना चाहिए।
केस-4 : धनौरा के ओमपाल का कहना है कि योजना का सर्वे दोबारा कराया जाना चाहिए। गरीबों को लाभ मिलना चाहिए।