कभी नेताजी के साथ लिया था अंग्रेजों से लोहा, आज बदहाली में जीवन
बड़ौत। जिन लोगों ने देश की आजादी के लिए नेताजी सुभाष चंद बोस के साथ मिलकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए, आज उनका परिवार ही बदहाल जीवन जीने को मजबूर है। घर के चारों ओर गंदगी फैली है और झाड़ियां खड़ी हैं। आएदिन घर में सांप-बिच्छू घुस आते हैं।
आजाद हिंद फौज में शामिल रहे बावली गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी इलम सिंह 106 साल के हो चुके है। देश तो आजाद हो गया, लेकिन इलम सिंह और उसका परिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। उनके मकान के पास गंदगी की भरमार है। गलियों मेें गंदा पानी भरा रहता है। घर के पास झाड़ियां हैं, जिनसे निकलकर जहरीले जीवन घर में घुसते हैं। लड़खड़ाती जुबान में बुजुर्ग इलम सिंह बताते हैं कि 1941-42 में उन्हें आजाद हिंद फौज में तोपखाने में काम पर लगाया गया था। 15 अगस्त 1972 को उन्हें दो ताम्रपत्र मिले, जिनमें से एक इंदिरा गांधी और दूसरा उप्र सरकार ने दिया। अविवाहित ईलम सिंह ने अपने भतीजे के बेटे अजित सिंह को गोद लिया हुआ है। इलम सिंह के परिवार के लोग बताते है कि 1999 से लगातार समस्या को लेकर देश के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, सांसद बागपत, डीएम व एसडीएम तक से शिकायत कर चुके है, लेकिन सुनवाई नहीं की गई। घर के पास की गंदगी उन्हें खुद ही साफ करनी पड़ती है।
झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने का किया प्रयास
इलम सिंह का कहना है कि उनके घर आने वाले रास्ते पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। जब शिकायत की तो लेखपाल ने विपक्षियों के साथ मिलकर मारपीट की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने का भी प्रयास किया था। फिलहाल डीएम ने रास्ते के निर्माण का आदेश दे रखा है, लेकिन सचिव फोन भी नहीं उठाते। एक सप्ताह में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो भूख हड़ताल करेंगे। वहीं जब इस संबंध में बीडीओ राहुल वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जनवरी के अंत तक रास्ते का निर्माण और सफाई करा दी जाएगी। सचिव की कोई कमी पाई गई तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।