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Baghpat News: सांसद ने घोटाले के आरोप लगाए, अफसरों ने फाइल दबाई

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बागपत। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 66 गांवों में कराए गए कार्यों में सांसद डा. सत्यपाल सिंह ने घोटाले के आरोप लगाए तो अफसरों ने जांच के लिए पत्र जरूर जारी किया लेकिन चार महीने बीतने पर जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी और उस फाइल को दबा दिया गया। जांच अधिकारी संबंधित कागज मांगते रहे और सचिवों ने कागज नहीं सौंपे। माना जा रहा है कि इसमें घोटाला मिल सकता है।
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स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत गांवों को ओडीएफ प्लस बनाने के लिए पिछले वर्ष 66 गांवों के लिए 30 करोड़ से ज्यादा रुपये जारी किए गए थे। जिससे गांवों में खाद के गड्ढे, आरसीसी सेंटर, शॉकपिट, पानी निकासी की नाली, नाले, कूड़ा एकत्र करने को ई-रिक्शा खरीदने समेत अन्य कार्य कराए जाने थे। स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत जुलाई 2023 तक करीब 70 प्रतिशत बजट खर्च कर दिया गया था। आरोप लगाया गया कि गांवों में कम राशि खर्च करके ज्यादा दिखाई जा रही है। जिला विकास एवं निगरानी समिति की बैठक में सांसद डा. सत्यपाल सिंह ने घोटाले का आरोप लगाया तो इन 66 गांवों में घोटाले की जांच कराने का फैसला लिया गया और सभी गांवों में जांच के लिए अधिकारी नियुक्त कर दिए गए।
लोनिवि, जल निगम, आरईएस के अधिकारियों को नहीं मिले अभिलेख
गांवों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत कराए गए कार्यों की जांच के लिए लोनिवि, जल निगम और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के 33 अधिकारियों को लगाया गया। इन सभी को दो-दो गांव की जांच का जिम्मा सौंपा गया और सूची भेजकर यह जानकारी दी गई है कि किस गांव को कितना बजट मिला था और उसमें से कितना खर्च हो गया है। लेकिन यह जानकारी नहीं दी गई है कि किस-किस कार्य पर कितना पैसा खर्च किया गया है।
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मैंने वापस पत्र भेजकर मांगे थे अभिलेख
स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में हुए कार्यों की जांच के लिए हमारे पास पत्र आया था, लेकिन उससे संबंधित पूरे अभिलेख ही नहीं दिए गए थे। मैंने वापस पत्र भेजकर उन सभी कार्यों के अभिलेख मांगे थे कि क्या-क्या कार्य कराए गए और किस कार्य पर कितना पैसा खर्च किया गया। अभिलेखों के बारे में अभी जानकारी नहीं है कि वह मिले या नहीं। अतुल कुमार, एक्सईएन लोनिवि

इस बारे में अभी कुछ पता नहीं
स्वच्छ भारत मिशन के तहत कराए गए कार्यों की जांच की जिम्मेदारी हमारे विभाग को मिली थी। इस तरह के कोई पत्र की जानकारी मुझे नहीं है। अब पूरी जानकारी करके ही बताया जा सकता है। इस तरह की जांच भी हमारे विभाग से नहीं हुई है। हबीबुल्ला, एक्सईएन, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग
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