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Baghpat News: बच्चों के उजले कल के लिए मां अपने कल को बदल रहीं

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बड़ौत। बड़ौत में बिनौली मार्ग पर रहने वाली रजनी का छह वर्षीय बेटा शुभम निजी स्कूल में पढ़ता है। घर में होमवर्क करता है तो अटकने पर रजनी से मदद मांगता है। रजनी ग्रेजुएशन कर चुकी हैं, मगर अंग्रेजी में कमजोर हैं। अब रजनी ने बेटे की पढ़ाई में मदद करने के लिए खुद अंग्रेजी सीखनी शुरू कर दी। रजनी ऐसी अकेली मां नहीं हैं, बल्कि कोचिंग सेंटर में अंग्रेजी सीखने जा रही ऐसी काफी महिलाएं हैं।
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इस समय अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। जहां हिंदी विषय को छोड़कर बाकी सभी विषयों की पढ़ाई अंग्रेजी में होती है। बच्चों की पढ़ाई में मदद के लिए अब उनकी माताओं ने भी अंग्रेजी कोचिंग सेंटरों में अपना रजिस्ट्रेशन कराया और वह अंग्रेजी बोलने व सीखने के लिए कक्षाएं ले रहीं हैं। बड़ौत के तीन कोचिंग सेंटर पर ऐसी 125 महिलाओं के रजिस्ट्रेशन हुए हैं और वह अंग्रेजी सीख रही हैं। इस तरह महिलाओं की पिछले कुछ समय से अंग्रेजी सीखने को लेकर रूचि बढ़ रही है।
-ऑनलाइन कक्षा लेकर भी सीख रहीं अंग्रेजी

ऑफलाइन कक्षा के साथ ही काफी महिलाएं घर बैठकर ऑनलाइन कक्षा लेकर अंग्रेजी समझना व बोलना सीख रहीं हैं। वह पहले कक्षा लेकर खुद समझकर बाद में अपने बच्चों को समझाती हैं। इनमें ऐसी भी महिलाएं हैं, जिनको पढ़ाई छोड़े हुए दस-दस साल हो चुके हैं। अब बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने दोबारा से किताब को उठाया है।
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-व्याकरण, शब्दाबली व उच्चारण का ज्ञान होना जरूरी

अंग्रेजी के शिक्षक जाहिद सैफी ने बताया कि अंग्रेजी बोलने व समझने के लिए व्याकरण, शब्दावली व उच्चारण का ज्ञान होना जरूरी है। जितनी अधिक शब्दावली याद होगी, उतना ही जल्दी अंग्रेजी समझ में आएगी। कक्षा के अलावा घर पर बोलने का अभ्यास करना भी जरूरी होगा। आज काफी संख्या में महिलाओं में अंग्रेजी सीखने के प्रति जागरुकता बढ़ रही है।


बच्चों के भविष्य को देखते हुए और घर में उनकी पढ़ाई में मदद करने के लिए कई माह से अंग्रेजी बोलने व समझने के लिए ऑनलाइन दो घंटे की क्लास चल रही है। उससे काफी अंग्रेजी सीखी है। -रितिका

यूपी बोर्ड के मुकाबले सीबीएसई बोर्ड के पाठ्यक्रम में बच्चों को अंग्रेजी समझने में मदद की आवश्यकता होती है। इसलिए उनके भविष्य को देखते हुए अंग्रेजी सीखना शुरू किया है। कई महीने से अंग्रेजी सीखने के कारण अब बेटे को काफी मदद मिलती है। -ममता
अंग्रेजी सीखने से बच्चों की पढ़ाई में मदद करना आसान है। स्कूल में शिक्षक-अभिभावक बैठक में बच्चों की पढ़ाई की स्थिति जानने के लिए सवाल-जवाब करने में भी आसानी है। अंग्रेजी सीखने से खुद को भी काफी अच्छा लग रहा है। -सुषमा
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