बागपत। चार जुलाई को वन महोत्सव कार्यक्रम के तहत लगाए गए ज्यादातर पौधे सूख गए हैं। वजह इनकी देखरेख न होना रहा। इन पौधों को न तो वक्त पर पानी दिया गया और न ही मवेशियों से बचाने के इंतजाम किए गए। कागजों पर यह भले ही जिम्मेदारों को हरे भरे दिख रहे हों, हकीकत में यह सूखे, मुरझाए और दम तोड़ चुकने वाली हालत में मिले। पिछले सालों में रोपे गए पौधे भी बड़ी संख्या में पेड़ बनने से पहले ही सूख गए।
प्रभारी मंत्री धर्मसिंह सैनी ने चार जुलाई को पुलिस लाइन में अधिकारियों के साथ मिलकर वन महोत्सव का शुभारंभ किया था। जिलाधिकारी, एसपी, सीडीओ आदि इसके अलावा विभिन्न विभागों ने मिलकर एक दिन में सवा 11 लाख से ज्यादा पौधे रोपे जाने का दावा किया गया था। पौधरोपण के दौरान इन्हें बचाने, देखरेख करने का संकल्प दिलाया गया था। इस पर बड़ा बजट भी खर्च किया गया। लेकिन इसके बाद इन पौधों का कोई हाल नहीं लिया गया। ऐसे में ज्यादातर पौधे देखरेख के अभाव में सूख गए। इसके अलावा पिछले सालों में लगाए गए पौधों का भी यही हाल है। कई जगह पौधे सूख गए तो कई जगह ट्रीगार्ड क्षतिग्रस्त हालत में हैं। कलक्ट्रेट परिसर, बीएसए कार्यालय और विकास भवन के बाहर लगे कई पौधे सूख गए हैं। रोजाना इनके पास से गुजरने वाले अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं।
पिछले दिनों बहुत गर्मी पड़ रही थी। ऐसे में हो सकता है कि पौधे सूख गए हों। ये पौधे बारिश होने पर फिर से हरे हो सकते हैं। पौधे लगाने वाले विभाग पर ही इनकी देखरेख की जिम्मेदारी होती है। इसके लिए शासन से बजट भी मिलता है। फिर भी हम इसे दिखवाएंगे। - कल्याण सिंह, डीएफओ।