कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। दो दिन पहले ही जिले में न्यूनतम तापमान चार डिग्री तक गिर गया, लेकिन गर्मी में लोगों को डंक मारने वाले मच्छरों पर सर्दी का सितम भी बेअसर है।
तापमान में गिरावट के बावजूद मच्छर लोगों को परेशान कर रहे हैं। यही वजह है कि बुखार के मरीजों की संख्या अभी भी बरकरार है। डॉक्टर स्वीकार करते हैं कि मच्छरों पर दवा बेअसर साबित हो रही है।
छिड़काव वाली दवा से भी अब मच्छरों का पूरी तरह खात्मा नहीं हो पा रहा है। मच्छरों में ठंड और इन दवा से लड़ने की क्षमता पैदा हुई है, इससे बीमारी का खतरा बढ़ा है। जबकि पहले गर्मी और बरसात में ही मच्छरों का प्रकोप दिखता था, जबकि इस बार ऐसा नहीं है।
कीटनाशक दवाई का छिड़काव करें। उन्होंने कहा मच्छरों से निपटने के लिए लोगों को आसपास के वातावरण में स्वच्छता रखनी होगी। जलभराव नहीं होने दें। नालियों मेें मिट्टी का तेल या पेट्रोल का छिड़काव करें।
यह फैलती हैं बीमारियां
बागपत। मच्छर से मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापनी बुखार समेत अन्य कई बीमारियां लोगों पर कहर ढाती है।
बुखार का बन रहे हैं कारण
बागपत। ठंड के बाद भी मच्छर दिख रहे हैं। यही नहीं बुखार का प्रकोप भी है। जिला अस्पताल में बुखार के रोजाना सैकड़ों मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें मलेरिया के भी केस हैं। रटौल गांव के लोगों दावा है कि एजाज (70) और अन्य तीन लोगों की बुखार के कारण मौत हो चुकी है।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
बागपत। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. नीरज त्यागी कहते हैं कि सर्दी में भी मच्छर खत्म नहीं हो रहे हैं। अधिकतर दवा का असर घटा है। बचाव के लिए जरूरी है कि लोग मच्छरदानी का प्रयोग करें।
टनाशक दवाई का छिड़काव करें। उन्होंने कहा मच्छरों से निपटने के लिए लोगों को आसपास के वातावरण में स्वच्छता रखनी होगी। जलभराव नहीं होने दें। नालियों मेें मिट्टी का तेल या पेट्रोल का छिड़काव करें।