बड़ौत। यहां राशन लेने के लिए जिंदा लोगों को चक्कर काटना पड़ता है और मुर्दे हर महीने 40 हजार क्विंटल राशन गटक रहे हैं। ई-केवाईसी नहीं कराने पर जब जांच कराई गई तो यह मामला पकड़ में आया। इन सभी के नाम राशन कार्डों से काटे जाएंगे और उनकी जगह नई यूनिट जोड़ी जाएंगी।
जिले में सरकारी सस्ते गल्ले की 379 दुकानें हैं और उन पर 2,07,295 कार्ड धारक हैं। विभाग की ओर से कार्ड धारकों की ई-केवाईसी कराई जा रही हैं। 76 फीसदी कार्ड धारकों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी हैं। इसके बाद जांच कराई गई तो पता चला कि आठ हजार लोग ऐसे मिले, जिनकी मौत हो चुकी है।
इसके बाद भी उनके नाम पर हर माह एक यूनिट पर पांच किग्रा के हिसाब से 40 हजार क्विंटल राशन लेकर सरकार को चूना लगाने का काम किया जा रहा था। इन सभी के एक सप्ताह के अंदर नाम काटे जाएंगे।
इस तरह हर माह चल रहे खेल का अधिकारियों को पता तक नहीं लगा। क्योंकि परिवार के एक व्यक्ति के मशीन पर अंगूठा लगाने से राशन मिल जाता है। मगर, ई-केवाईसी प्रत्येक सदस्य का कराना अनिवार्य हो गया है। (संवाद)