जीवन क्षण भंगुर संभलकर जियो -आचार्य विशुद्ध सागर
-आचार्य सहित 27 मुनिराजो ने किया दिल्ली के लिए पद विहार
फोटो संख्या 5
बड़ौत। दिगम्बर जैनाचार्य विशुद्धसागर ने कहा कि ज्ञान के समान सुख प्रदान करने वाला अन्य कोई नहीं है। ज्ञान होते ही सुख प्रारम्भ हो जाता है। ज्ञान से सम्यक्त्व निर्मल होता है और चारित्र पवित्र होता है। ज्ञान के समान कोई हितकर नहीं और अज्ञान के समान शत्रु नहीं। विनय से विद्या सिद्ध होती है। विनय, अभ्यास और लगन से ज्ञान की प्राप्ति होती है।
जैनमुनि बुधवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्ञान से ही हिताहित का सम्यक-बोध होता है। ज्ञान शून्य, विवेकहीन जीवन, बिना ब्रेक के वाहन जैसा अहितकारी है। ज्ञान का अभ्यास करो, ज्ञान पूर्वक जीवन जियो। ज्ञान के समान अन्य कोई उपकारी नहीं। ज्ञान में सुख-शांति और आनन्द है। ज्ञानी का जीवन आलौकिक, अनुकरणीय और प्रेरक होता है। ज्ञान से व्यक्ति उंचाइयां प्राप्त कर सकता है और अज्ञानता से अपयश, कष्ट प्राप्त करता है। जीवन क्षण भंगुर है, इसलिए हर पल संभलकर जिंदगी जियो। जीवन का कुछ भरोसा नहीं, कब कहां जीवन लीला पूर्ण हो जाए। पल-पल सजग रहो, जागृति पूर्ण जीवन जियो। कहा कि एक पानी बूंद नाली में गिरती है और एक पानी की बूंद सीप में गिरकर मोती बनती है। एक पुष्प शव पर चढ़ता है, एक पुष्प शिव पर चढ़ता है। हर वस्तु का सम्यक प्रयोग करो, उपयोग पवित्र करो। श्रेष्ठ मनुष्य वही है, जो गुरुवाणी सुने, प्रभु दर्शन करे, संयमित जीवन जियें। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि दोपहर में ढाई बजे आचार्य
सहित 27 मुनिराजों ने दिल्ली के लिए मंगल विहार किया। आचार्य के 5 माह के ऐतिहासिक चतुर्मास में 8 मुनि दीक्षा हुई, पंचकल्याणक महोत्सव हुआ और अनेक धार्मिक आयोजन हुए।