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हत्याएं बनीं तबादले की वजह, सिर्फ दो महीना कप्तान रहे अजय

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बागपत एसपी अजय कुमार - फोटो : BAGHPAT
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हत्याएं बनीं तबादले की वजह, सिर्फ दो महीना कप्तान रहे अजय
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परमवीर तुगाना, देशपाल बदरखा और संजय खोखर की हत्या की गूंज लखनऊ तक पहुंची
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। जिले में एक के बाद एक तीन राजनीतिक हत्याओं की गूंज लखनऊ तक हुई। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय खोखर की हत्या के बाद जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय पुलिस पर सवाल खड़े किए। विधायक योगेश धामा ने एसपी पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया था। अजय कुमार सिंह के तबादले के पीछे इन्हीं बातों का वजह माना जा रहा है।
जिले के एसपी रहे प्रताप गोपेंद्र यादव का 16 जून को तबादला होने के बाद कमान एसपी अजय कुमार सिंह को सौंपी गई थी। पिछले दो महीने में अपराध की कई बड़ी वारदात हुईं, जिस कारण जिले की बदनामी हुई और मामला लखनऊ तक गूंजता रहा। छपरौली थाना क्षेत्र में अपराध बेकाबू हो गया। यही अजय कुमार सिंह के तबादले का कारण बना।
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केस-1
कूड़ी गांव में 22 जून को कुख्यात परमवीर तुगाना और उसके साथियों पर फायरिंग की गई। अस्पताल में उपचार के दौरान परमवीर की मौत हो गई। पुलिस ने खुलासा किया जिला पंचायत चुनाव की रंजिश में सुनील राठी ने हत्या की वारदात कराई है।
केस-दो
बदरखा गांव में रालोद नेता देशपाल बदरखा की सात जुलाई को हत्या कर दी गई। सरेआम हुई हत्या में भी पुलिस की लापरवाही रही। बदरखा में पिछले दो साल से बन रहे तनाव के माहौल को पुलिस-प्रशासन के लोग नहीं भांप सके।
केस-तीन
गाधी गांव में युवकों के बीच हुए झगड़े पर पुलिस ने लीपापोती की। यही वजह रही है कि फेसबुक को लेकर शुरू हुआ झगड़ा रक्षाबंधन के दिन खून-खराबे में बदल गया। तीन अगस्त को रवित की हत्या कर दी गई। पुलिस की बड़ी चूक गाधी में हुई।
केस-चार
छपरौली के तिलवाड़ा मार्ग पर 11 अगस्त की सुबह साढ़े छह बजे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय खोखर की हत्या कर दी गई। पुलिस पर सवाल उठे। इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया। तीन आरोपी अब तक गिरफ्तार हो चुके हैं।
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नए कप्तान अभिषेक सिंह के सामने चुनौतियां
बागपत। जिले में लगातार हो रही हत्याओं को रोकने की चुनौती नए कप्तान के सामने होगी। आमजन के बीच भय का माहौल है। पुलिस की जिले में खराब हो रही छवि को सुधारने के लिए भी उन्हें काम करना होगा।
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