खाप और राजनीति
भले ही सीधे तौर पर खापों के प्रमुख चुप हों और किसी का समर्थन नहीं करने की बात कर रहे हों, लेकिन खापों का राजनीतिक झुकाव किसी न किसी पार्टी को लेकर छिपा नहीं है तो बालियान खाप के राकेश टिकैत खुद भी चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अलावा कई खापों से जुड़े लोग राजनीतिक पार्टियों के साथ भी जुड़े हैं।
माना जाता है कि खाप चौधरियों के इशारे पर कुछ न कुछ वोटों का रुख बदला जा सकता है और इसलिए ही प्रत्याशियों ने देशखाप चौधरी सुरेंद्र चौधरी, पंवार खाप के चौधरी धर्मवीर पंवार, सुभाष चौधरी, ओमपाल दांगी समेत अन्य के पास पहुंचना शुरू कर दिया। यहां तक की गठवाला व बालियान खाप के चौधरी का अन्य जगहों पर असर होने के कारण भी प्रत्याशी उनके पास पहुंचकर आशीर्वाद ले रहे हैं।
खाप का ऐतिहासिक दायरा
छठी शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन ने बालाण (बालियान) चौरासी खाप के चौधरी को टीका कर टिकैत की उपाधि दी थी। अंग्रेजों ने दिल्ली पर चढ़ाई की तो आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर ने सर्वखाप पंचायत के केंद्र सोरम से मदद मांगी। आजादी की लड़ाई में पश्चिम यूपी की खाप पंचायतों का गौरवशाली योगदान रहा। स्वतंत्रता के बाद संविधान लागू हुआ तो खापों का दायरा सिमटता नजर आया।
खाप पंचायत में शामिल चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
आमने-सामने हैं खापों से संबंधित प्रत्याशी
बालियान खाप के गांव कुटबी के रहने वाले केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान भाजपा और गठवाला खाप के कादीखेड़ा गांव के रखने वाले हरेंद्र मलिक सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में है। बालियान खाप के अधिकतर गांव मुजफ्फरनगर लोकसभा में पड़ते हैं। गठवाला खाप के गांव मुजफ्फरनगर, कैराना और बिजनौर लोकसभा को प्रभावित करते हैं। बागपत सीट से सपा के प्रत्याशी बनाए गए मनोज चौधरी पंवार खाप से है। कैराना और बागपत लोकसभा में इस खाप के अधिकतर गांव है। बागपत से रालोद प्रत्याशी बनाए गए राजकुमार सांगवान की खाप सांगवान के सिवालखास और मोदीनगर क्षेत्र में 12 गांव हैं। खाप के प्रधान हरियाणा के दादरी के निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान है।
ठाकुरों की पंचायत सात अप्रैल को
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी तादाद में ठाकुर वोट बैंक है। ठाकुर समाज ने सहारनपुर के नानौता में सात अप्रैल को तीन लोकसभा चुनाव पर फैसले के लिए पंचायत बुलाई है। देखने वाली बात यह होगी कि इस बार खाप की चुनाव पर कितनी छाप पड़ेगी।
खाप चौधरियों की ताकत से बनी थी भाकियू
बिजली के बिलों से परेशान किसानों की अगुवाई खाप चौधरियों ने ही की थी। शामली के करमूखेड़ी में हुए एतिहासिक आंदोलन में खाप चौधरी ही नेतृत्व कर रहे थे। आंदोलन का सत्ता पर असर पड़ा तो सर्वखाप चौधरियों ने ही सर्वसम्मति से भाकियू का गठन कर बालियान खाप के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को अध्यक्ष बनाया था। इसके बाद बाबा महेंद्र सिंह टिकैत देशभर के किसानों के मसीहा बन गए।
सोरम चौपाल को दिए एक करोड़ रुपये
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने सर्वखाप पंचायत के केंद्र सोरम में स्थित एतिहासिक चौपाल के जीर्णेाद्वार के लिए एक करोड़ से अधिक की धनराशि दी है। वर्तमान में चौपाल को नया रूप दिया जा रहा है।
बागपत में खापों की शृंखला
देशखाप : 84 गांवों तक पकड़ है। इसके मुखिया सुरेंद्र चौधरी कहते हैं कि खाप सामाजिक सुधार और न्याय व्यवस्था के संचालन के लिए पुराने समय से काम कर रही है। आज भी लोग खाप व खाप चौधरियों का मान रखते हैं। इसलिए राजनीति से जुड़े लोग व नेता मिलने आ जाते हैं। खापों का सीधे तौर पर किसी पार्टी से जुड़ाव नहीं है।
पंवार: इस खाप के आठ गांव है। चौधरी धर्मवीर पंवार कहते हैं कि खाप चौधरियों के फैसले ने हमेशा समाज को मजबूत बनाने व नई दिशा देने का काम किया है। किसी एक पक्ष का पक्षधर खाप नहीं रही है। आज भी लोग खाप के फैसलों का सम्मान करते हैं और हमारे लिए राजनीतिक व गैर राजनीतिक सभी एक समान हैं।
चौबीसी: 24 गांवों को मिलाकर बनाई गई खाप को चौबीसी खाप कहा जाता है, जिसके चौधरी सुभाष चौधरी हैं। वह कहते हैं कि अब समाज को जोड़कर चलने की जरूरत है। वोट पर सबका अपना अधिकार है। किसी एक की खास नहीं हो सकती जो भी हमारे घर आएगा, उसका सम्मान किया जाएगा
दांगी: दांगी खाप के यहां पांच गांव है तो अन्य जिलों व राज्यों में काफी गांव है। खाप के चौधरी ओमपाल दांगी कहते है कि सभी प्रत्याशी हमारे घर आए हैं। वोट का फैसला जनता का है। जनता जिसे चाहेगी, उसे वोट करेगी। मगर आपसी मतभेद भुलाकर सभी मतदान करें।
मूलेजाट: यहां मूलेजाट खाप के पांच गांव हैं तो आसपास के सभी जिलों में इस खाप का असर है। मूलेजाट खाप के चौधरी यामीन चौधरी कहते है कि हर कोई संपर्क जरूर करता है। मगर पक्ष व विपक्ष कराना खाप का काम नहीं है। हम सभी से मतदान की अपील करते हैं और चुनाव में सौहार्द की अपील भी करते हैं।
राणा: राणा खाप के पांच गांव हैं तो वेस्ट यूपी के अन्य जिलों में भी खाप का असर है। खाप के चौधरी कृषिपाल राणा कहते है कि प्रत्याशी हर बार चुनावों में आते हैं और हमारे दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं। कोई भी प्रत्याशी हो, उसे जनता की सेवा करनी चाहिए। जनता वोट देती है, इसलिए शिक्षित, विकासशील प्रत्याशी के लिए मतदान करें।
किसान अपनी मर्जी से डालें वोट : टिकैत
बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत कहते हैं कि लोग अपनी मर्जी से मतदान करें। देश के भविष्य का चुनाव है। खाप चौधरियों को एकजुट और एकराय रहना चाहिए। समय-समय पर इसके लिए प्रयास भी करते हैं।
अपने मुद्दों पर करें मतदान : मलिक
गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र मलिक कहते हैं कि गांव और गरीब की बात करने वालों को लाभ मिलता है। लोगों को अपने मुद्दों पर मतदान करना चाहिए। खाप हमेशा सामाजिक न्याय और एकजुटता की बात करती रही है।
गांव-गरीब तक पहुंचे विकास : ठाठ सिंह
जौला चौबीसी के चौधरी ठाकुर ठाठ सिंह कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों को समाज की सेवा करनी चाहिए। गरीब का भला हो और विकास गांव तक पहुंचे। क्षेत्र के हिसाब से मुद्दे बदलते हैं, अपने मुद्दों पर मतदान करना चाहिए।
जनता की सेवा करें नेता : शर्मा
ब्राह्मण समाज के चौधरी घनश्याम दास शर्मा का मानना है कि मतदान अधिक से अधिक होना चाहिए। अपने मुद्दों पर वोट डालना चाहिए। नेता को जनता की सेवा अधिक से अधिक करनी चाहिए।
खापों की सब पर नजर : सुभाष
सर्वखाप मंत्री सुभाष बालियान ने कहा कि जब तक जरूरत नहीं पड़ती खाप पंचायतें कहीं भी दखल नहीं करती है। खाप चौधरियों और पंचायतों की सब पर नजर है। समाज के मुद्दे और उन्हीं मुद्दों पर सबको मतदान करना चाहिए।
ब्राह्मण खाप भी एकजुट
बालियान खाप का केंद्र सिसौली है। साथ ही इस खाप के अंतर्गत गांवों की अन्य बिरादरियों की खाप का केंद्र भी यह कस्बा ही माना जाता है। इसी क्रम में ब्राह्मण समाज की खाप पंचायत की गतिविधि सिसौली से ही संचालित होती है। इसके चौधरी घनश्याम दास शर्मा लोगों को एकजुट और जागरूक कर रहे हैं। उनके प्रतिनिधित्व को लेकर पिछले दिनों विवाद भी हुआ था, जिसमें सर्वसमाज के लोग जुटे थे।
1989 के चुनावों से दिखा ज्यादा
खुलकर चुनावों में खाप चौधरियों का दखल कम रहा, लेकिन इशारे और आशीर्वाद खूब चर्चाओं में रहते हैं। खाप पंचायतों का सबसे ज्यादा असर भाकियू के गठन के बाद वर्ष 1989 में हुए लोकसभा व विधानसभा चुनाव पर दिखा। मुफ्ती मोहम्मद सईद चुनाव जीतकर गृहमंत्री बने थे।
1991 में भाजपा ने सिसौली के रहने वाले शिक्षक नरेश बालियान को टिकट दिया तो पहली बार मुजफ्फरनगर लोकसभा में भाजपा का खाता खुला था। 1996 में भारतीय किसान कामगार पार्टी बनी, जिसके पहले चुनाव की जीत में खाप चौधरियों के संदेश की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। भाकियू नेता रहे राजपाल बालियान तब खतौली से चुनाव जीतकर विधायक चुने गए थे।
गुर्जर कलस्यान खाप का केंद्र कैराना: पश्चिम में गुर्जर समाज की सबसे बड़ी खाप कलस्यान गुर्जर का केंद्र कैराना है। दिवंगत सांसद हुकुम सिंह के बड़े भाई मुखत्यार सिंह इस खाप के चौधरी रहे हैं। सर्व जातीय खाप पंचायतों में हुकुम सिंह की स्वीकार्यता और आवाजाही भी रही। गुर्जर समाज की रामपुर में खूबड़ (पंवार) खाप बड़ी है।
असरदार है ठाकुर चौबीसी, खेड़ा : सामाजिक कार्येां और चुनावों में भी ठाकुर बिरादरी की खाप पंचायतें असरदार रही हैं। देशभर में फैली पुंडीर खाप कहीं 12 तो कहीं 14 गांवों में बंटी हुई है। जौला गांव की ठाकुर चौबीसी और सरधना के खेड़ा की सोम खाप असरदार है।
मुस्लिम समाज भी खाप से अछूता नहीं मुस्लिम समाज में खाप का असर है। जौला गांवा के दिवंगत गुलाम मोहम्मद सामाजिक कार्यों और पंचायतों में शामिल रहे। मुस्लिम बालियान खाप की चौधराहट का केंद्र भी सिसौली है। हुसैन आलम खाप के चौधरी हैं।