बदमाशों की गोली से घायल सिपाही की मौत
दिल्ली से मेरठ जाते समय हुई थी वारदात, रीढ़ की हड्डी में फंस गई थी गोली
अमर उजाला ब्यूरो
अमीनगर सराय (बागपत)। सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र में लूट का विरोध करने पर बदमाशों की गोली से घायल दिल्ली पुलिस के सिपाही मनीष यादव की उपचार के दौरान देर रात मेरठ में मौत हो गई। मनीष की मौत होने पर परिजनों में कोहराम मच गया है। खुलासे के लिए पुलिस की चार टीमें गठित की गई हैं।
मेरठ के डालूहेड़ा निवासी मनीष यादव (35) पुत्र कृष्णपाल यादव सोमवार को बाइक पर दिल्ली से अपने गांव लौट रहा था। रोशनगढ़ गेट के पास दो बाइक सवार चार बदमाशों ने मनीष को रोका और उससे पर्स लूट लिया। विरोध करने पर कहासुनी और मारपीट हुई। इस दौरान एक बदमाश ने सिपाही को गोली मार दी। मनीष को मेरठ के केएमसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मनीष के पेट के बाईं ओर गोली लगी थी, जो कि रीढ़ की हड्डी में जाकर फंस गई थी। देर रात दो बजे उपचार के दौरान सिपाही की मौत हो गई।
मुकदमा दर्ज, खुलासे के लिए चार टीमें गठित
मनीष की मौत के मामले में पुलिस ने चार अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। खुलासे के लिए चार टीमें गठित की गई हैं। सीओ सदर ओमपाल सिंह ने बताया कि पुलिस ने मृतक के चाचा अभयराम यादव की तहरीर पर जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया था। अब इस मुकदमे को हत्या में तरमीम किया जाएगा। कई संदिग्ध हिरासत में लिए हैं। ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है।
पर्स लूट लिया है, गोली क्यों मार रहे हो?
बदमाशों के जाने के बाद पुलिस बाद में पहुंची, जबकि दूर होने के बावजूद परिजन पहले पहुंच गए थे। उन्होंने ही मनीष को अस्पताल में भर्ती कराया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि लहूलुहान होने के बावजूद सिपाही ने घटना के बारे में बताया था। सिपाही ने बदमाशों से कहा था कि पर्स लूट लिया है, अब गोली क्यों मार रहे हो। लेकिन बदमाशों ने उसकी नहीं सुनी और गोली मार दी।
2010 में सीआईएसएफ में हुए थे भर्ती
पिता कृष्णपाल ने बताया कि 2010 में मनीष सीआईएसएफ में भर्ती हुआ था। मनीष ने दिल्ली पुलिस के लिए भी आवेदन किया हुआ था। 2011 में परीक्षा पास करने के बाद वह दिल्ली पुलिस में सिपाही के पद तैनात हो गया। 2012 में मनीष की शादी बागपत क्षेत्र के फलहरा गांव की अंशु से हुई थी। दोनों के तीन बच्चे बेटी संभवी (5), वैष्णवी (3) और एक साल का बेटा अवनी है।
पत्नी और मां हुईं बेहोश
मनीष की मौत की सूचना मिलते ही गांव में मातम पसर गया। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। मनीष की पत्नी अंशु और मां शांति रोते हुए कई बार बेहोश हुईं। गांव की महिलाओं ने जैसे तैसे उन्हें संभला। मनीष के बच्चे घर पर भीड़ को देखकर घबराकर रोने लगे। यह देख पड़ोसी व्यक्ति उन्हें अपने घर ले गया।
डालूहेड़ा में गम, सिपाही का अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार को शव गांव पहुंचा, तो सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ लग गई। जानी थाने के अलावा सिंघावली अहीर थाने की पुलिस भी मौजूद रही। मंगलवार दोपहर को हिंडन नदी पर सिपाही के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। बड़े भाई अमरदीप ने मुखाग्नि दी।