- नगर पालिका क्षेत्र वर्ष 2001 में तीन वर्ग किलोमीटर तो अब 16 वर्ग किलोमीटर हुआ, कई नए मोहल्ले बसे
- वर्ष 2001 में 36 हजार थी आबादी, 2021 में 80 हजार से ज्यादा हो गई, सुविधाएं नहीं बढ़ रही
- बस अड्डा नहीं बन सका, पेयजल व पानी निकासी की समस्या, बाजार में चंद दुकानें बढ़ सकी तो पार्क तक नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। बागपत नगर पालिका का 20 साल में दायरा पांच गुना बढ़ गया है। आबादी भी ढाई गुना बढ़ गई। जिन जगहों पर जंगल दिखाई देते थे, वहां मकान ही मकान नजर आने लगे है। मेरठ रोड, चमरावल रोड, बड़ौत रोड पर कई कालोनियां बस गई है, लेकिन सुविधाएं आज भी यहां बेहतर नहीं हो सकी है। बस अड्डा व पार्क तक नहीं है तो सड़कों की हालत भी खराब है। पेयजल की समस्या बनी हुई है। अन्य काफी सुविधाओं के लिए लोग बीस साल बाद भी तरस रहे है।
तीन से बढ़कर 16 वर्ग किमी हुआ दायरा
बागपत नगर पालिका का वर्ष 2001 में क्षेत्रफल तीन वर्ग किमी होता था। अब यह 16 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है। वर्ष 2001 में नगर पालिका क्षेत्र में केवल पांच हजार मकान थे जो वर्ष 2011 में 7663 हो गए थे। अब यहां 11697 मकान है। इस तरह आबादी भी बढ़ती चली गई और वर्ष 2001 में आबादी 36,874 थी। 2011 में बढ़कर 50,380 हो गई थी। अब यहां करीब 80 हजार की आबादी है।
बस गए नए मोहल्ले व कालोनियां
बागपत में पुराने कस्बे से लेकर नेशनल हाईवे के किनारों पर नई कालोनियां व मोहल्ले बस गए है। जहां नौरोजपुर रोड पर आयशा कालोनी, यमुना रोड पर इस्लामनगर व पक्का घाट कालोनी, बड़ौत रोड पर चौहान एंक्लेव, कृष्णा एंक्लेव, ज्ञान एंक्लेव, दिल्ली रोड पर ग्रीन सिटी कालोनी, मेरठ रोड पर सिटी प्लाजा, आर्य नगर समेत सड़क के दोनों तरफ मकान बन गए है। चमरावल रोड पर गर्ग एंक्लेव और पुराने कस्बे में नई बस्ती बढ़ी है। इनमें से काफी पॉश कालोनियां है। पहले यहां पॉश कालोनियों के नाम पर केवल मुन्ना लाल एंक्लेव व न्यू कालोनी होती थी।
बस अड्डा तक नहीं तो घूमने के लिए एक पार्क भी नहीं
जिस तरह से आबादी बढ़ने से नगर पालिका का दायरा बढ़ रहा है, उस तरह से यहां सुविधाएं नहीं बढ़ रही है। यहां की सबसे बड़ी जरूरत बस अड्डा आज तक नहीं बन सका है। बीस साल बाद भी केवल जमीन चिह्नित करने तक ही कार्रवाई पहुंची है। लोगों के लिए सुबह-शाम घूमने के लिए पार्क तक नहीं है। यमुना किनारे पक्का घाट को कुछ विकसित किया गया था, लेकिन वहां भी झूले व पत्थर तोड़ दिए गए है।
पानी, सड़क आदि मूलभूत समस्याएं भी दूर नहीं हुई तो बाजार भी नहीं बढ़ा
पुराने कस्बे में सड़कों की हालत खराब है और केतीपुरा समेत कई जगह कच्चे रास्ते है। पेयजल की समस्या भी पुराने कस्बे समेत कई जगह पर बनी हुई है। बारिश में पानी निकासी की समस्या सबसे ज्यादा रहती है। इनके अलावा बीस साल में केवल कुछ दुकानें जरूर बढ़ी, लेकिन बाजार का दायरा उतना ही है। यहां न कोई मॉल खुला तो मनोरंजन का भी कोई साधन नहीं है।
बीस साल में आबादी व मकान काफी बढ़ गए, लेकिन सुविधाएं कुछ नहीं बढ़ी है। आज भी सड़कें खराब है तो पानी तक की समस्या है। बस अड्डा यहां की सबसे बड़ी जरूरत है, जिस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा भी कोई सुविधा नहीं बढ़ी है। - राधेश्याम शर्मा, नागरिक
यहां केवल आबादी व क्षेत्रफल बढ़ रहा है। अन्य सुविधाएं आज भी पहले जैसी है। बस अड्डा तक नहीं है तो बाजार में कुछ बदलाव नहीं हुआ है। यहां के व्यापारी भी दिल्ली की तरफ जा रहे है, जिसका बड़ा कारण विकास नहीं होना है। - संजय रूहेला, महामंत्री संयुक्त व्यापार एसोसिएशन
विकास कार्य लगातार कराए जा रहे है और पेयजल से लेकर पानी निकासी तक की समस्या को दूर किया जा रहा है। यहां पिछले कुछ सालों में काफी काम कराया गया है। जहां तक बीस साल की बात है तो उसके मुकाबले अब विकास कार्य तेजी से हो रहा है। - ललित आर्य, ईओ नगर पालिका