संवाद न्यूज एजेंसी
छपरौली। बदरखा के प्राचीन शिव मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य जय सागर महाराज ने रविवार को श्रद्धालुओं को भक्त ध्रुव की भक्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति से ही मानव का कल्याण संभव है। राजकुमार ध्रुव ने राक्षस कुल में पैदा होने के बाद भी ईश्वर की भक्ति से परम पद को प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति के लिए मन की एकाग्रता जरूरी है। ध्रुव ने मन को एकाग्र कर भगवान विष्णु की भक्ति की। उन्होंने सूखे पत्ते, जल, वायु ग्रहण कर और एक पांव पर खड़े होकर भगवान विष्णु की तपस्या कर उन्हें खुश किया। ध्रुव की कठोर तपस्या को देखकर देवताओं ने भगवान विष्णु से ध्रुव को तप से निवृत्त करने की प्रार्थना की। ध्रुव ने अपने तपो बल से भगवान विष्णु की कठोर तपस्या कर परम पद को प्राप्त किया। कथा के बाद मंदिर में भगवान के वामन अवतार की मनमोहक झांकी निकाली। मंदिर समिति के अध्यक्ष रामशरण जिंदल, मास्टर रामपाल शर्मा, मा. पवन कुमार शर्मा, मा. संतोष शर्मा, मा. विनोद शर्मा, बिल्लू शर्मा, शुभम शर्मा आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।